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काॅमर्शियल वाहनों के रजिस्ट्रेशन का काम डीलर्स को देने की तैयारी

3 वर्ष पहले
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ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर | जयपुर

ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में काम के निजीकरण की गति तेजी से होती जा रही है। विभाग फिटनेस, प्राइवेट वाहनों के रजिस्ट्रेशन के बाद अब कॉमर्शियल वाहनों के रजिस्ट्रेशन का काम डीलर्स को सौंपने की तैयारी कर रहा है। इस संबंध में अधिकारियों की बैठक हो चुकी है। विभाग के प्रस्ताव को परिवहन मंत्री यूनुस खान ने भी हरी झंडी दे दी है। शुरूआत में विभाग 16 हजार 200 किलोग्राम से अधिक वजन वाले कॉमर्शियल वाहनों के रजिस्ट्रेशन का अधिकार डीलर्स को दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह काम डीलर्स के हाथों में होगा। ऐसे में प्राइवेट वाहनों के रजिस्ट्रेशन का काम नहीं संभलने वाले डीलर्स को कामर्शियल का काम देने के बाद अनियमितताओं की संख्या बढ़ जाएगी।

अभी एक महीने बाद मिल रही है आरसी

हालात यह है कि डीलर्स के रजिस्ट्रेशन होने वाले वाहनों को एक महीने बाद आरसी मिल रही है। इसकी वजह यह है कि डीलर्स रजिस्ट्रेशन के 10 दिन बाद तो आरटीओ को प्रिंट होने के लिए आरसी भेज रहे हैं। प्रिंट होने के कई दिनों बाद लेकर नहीं जाते। इसके बाद वाहन मालिक को वापस से आरसी लेने आना पड़ रहा है। वाहन मालिकों को आरटीओ की चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

प्राइवेट वाहनों के बाद कॉमर्शियल वाहनों के रजिस्ट्रेशन का काम भी डीलर्स को दिया जा रहा है। इसकी फाइल परिवहन मंत्री से स्वीकृत हो कर आ चुकी है। जल्द ही आदेश किया जाएगा। शैलेंद्र अग्रवाल, एसीएस परिवहन

यह होगा नुकसान : वर्तमान में डीलर्स के माध्यम से हर दिन करीब 2 हजार से अधिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। डीलर्स के यहां विभागीय लेखा अधिकारी नहीं होने से टैक्स गणना में परेशानी होगी। इससे टैक्स चोरी के मामले बढ़ जाएंगे। वाहनों को नंबर प्लेट सहित अन्य काम के लिए अतिरिक्त राशि पहले से दुगनी हो जाएगी। मैनपावर कम होने से आरसी और दस्तावेजों के लिए डीलर्स के चक्कर लगाने पड़ेंगे। रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों में आधे-अधूरे पते और बिना पार्किंग शपथ पत्रों के वाहनों के रजिस्ट्रेशन होने की संख्या बढ़ जाएगी। वाहन मालिक को फिटनेस, परमिट के लिए आरटीओ ऑफिस आना होगा। ऐसे में वाहन मालिक को ा नुकसान अधिक होगा।

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