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5 माह पहले कब्जे की रिपोर्ट पूरा जेडीए बना मूकदर्शक

3 वर्ष पहले
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इन्फ्रा रिपोर्टर. जयपुर | पृथ्वीराज नगर के गोल्यावास की बेशकीमती 104 बीघा जमीन पर जेडीए के ही बड़े अफसरों ने जानबूझकर कब्जे कराए। जोन के अमीन और तहसीलदार ने यहां बन रही चारदीवारियों के लिए 5 महीने पहले ही आगाह कर दिया था। भास्कर के पास नोटशीट की वो कॉपी है, जिसमें अमीन ने लिखा कि मौके पर अवैध निर्माण को हटाने के लिए संयुक्त अभियान से कार्रवाई की जानी चाहिए। क्योंकि इस तरह के अवैध निर्माण को रोकने के लिए हाईकोर्ट के आदेश हैं, वहीं यह भूमि जेडीए की अवाप्तशुदा है, जिसका रकबा काफी बड़ा है और इसका चिह्निकरण मौके पर ही किया जा सकता है। अमीन की इस रिपोर्ट पर तहसीलदार ने भी सहमति जताते हुए सामूहिक अभियान के जरिए अवैध निर्माण हटाने की बात लिखी। इसके बाद एनफोर्समेंट को रिपोर्ट भेजकर जोन अधिकारी ने इतिश्री कर ली। इस रिपोर्ट के बाद भी मौके पर कई अवैध बाउंड्रीज बनाई गई। जेडीए मौके पर बनी चारदीवारियों को अवैध निर्माण बता रहा है, लेकिन इस ओर कार्रवाई कराने से बच रहे हैं।

अवैध निर्माण मानकर भी तोड़ना तय नहीं
एडिशनल एसपी व चीफ एनफोर्समेंट अधिकारी राजेंद्र सिंह से सवाल

Q. गोल्यावास में हुए अवैध निर्माण पर क्या कर रहे हैं?

पीआरएन की अवाप्तशुदा जमीन पर अब कोई अवैध निर्माण नहीं हो, इसके लिए जेडीसी के आदेश पर मैंने एनफोर्समेंट अधिकारी को पाबंद कर दिया है।

Q. अवैध निर्माण रोकने ही थे फिर इतनी तादात में कैसे हो गए?

अब पहले का क्या कहें। इस बारे में हम बात कर रहे हैं, अब नहीं होने देंगे।

Q. सालभर पहले वह पूरी जगह खाली थी, जिसके चलते कैंप भी रद्द हो गया था, अब क्या इसी के लिए अवैध निर्माण पर जेडीए चुप रहा?

मैं बता दूं कि हमारा इसमें कोई रोल नहीं है।

Q. फिर हाईकोर्ट की रोक और रेवेन्यू कोर्ट के स्टे के बावजूद जो अवैध निर्माण हुए, उनको तोड़ते क्यों नहीं?

इस बारे में हम प्लानिंग करेंगे।

खाली जमीन पर कैंप संभव नहीं था तो बाउंड्रीज बनवाई

पृथ्वीराज नगर के गोल्यावास में जिस जमीन पर सरेआम बाउंड्रीवाल बनाकर जमीन कब्जाई जा रही है, वह सालभर पहले पूरी तरह खाली पड़ी थी। संबंधित जमीन पर नियमन कराने के लिए जेडीए को दस्तावेज पेश किए हुए थे। लेकिन तब जेडीए ने यही तर्क देकर नियमन से इंकार कर दिया कि खाली जमीन का कोई कैंप नहीं लगाया जा सकता। इसके बाद से ही मौके पर बाउंड्रीवॉल बनाने का रास्ता भी दिखा दिया गया।

मेरे पास अमीन के जरिए मौके की रिपोर्ट आई थी, जिसमें अतिक्रमण की बात लिखी गई थी। मैंने इस पर अपनी राय लिखकर इसे हटवाने के लिए ऊपर लिख दिया। क्योंकि तहसीलदार के पास तो यहां अतिक्रमण हटाने के पावर नहीं है। अवैध निर्माण तो हो ही रहे हैं। लेकिन इनको तो अब ऊपर वालों को ही हटवाना है। -प्रेमसिंह, संबंधित तहसीलदार, पीआरएन

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