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22 साल पहले फेल छात्र को पास किया, तत्कालीन कन्वीनर को दो साल की सजा

3 वर्ष पहले
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एसीबी मामलों की विशेष कोर्ट-2 ने 22 साल पहले राजस्थान यूनिवर्सिटी के बी-कॉम प्रथम वर्ष की परीक्षा में फेल एक छात्र से मिलीभगत कर उसके पुनर्मूल्यांकन में आए अंकों में कांट-छांट कर उसे पास करने के अपराध में पुनर्मूल्यांकन समिति के तत्कालीन कन्वीनर एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर लक्ष्मी चंद पहाड़िया को 2 साल जेल की सजा दी है। वहीं कोर्ट ने लाभार्थी छात्र रिपुदमन सिंह राजावत को संदेह लाभ में बरी कर दिया। मामले के अनुसार, एसीबी को सूचना मिली थी कि यूनिवर्सिटी में पुनर्मूल्यांकन में अनियमितता हो रही है। एसीबी ने बाद में 23 जून 1997 को जांच कर मामला दर्ज किया। इसमें कहा कि बी-कॉम पार्ट प्रथम का 6 जुलाई, 1996 को परिणाम जारी हुआ। छात्र राजावत ने 19 जुलाई को दो पेपरों का पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया। एसोसिएट प्रोफेसर नाथूलाल ने पेपर प्रथम में 21 अंक दिए तथा सुरेन्द्र सिंह ने द्बितीय पेपर में 20 अंक दिए थे। मामले में पहाड़िया पर आरोप है कि उन्होंने 21 अंक को 32 व 20 अंक को 40 अंक किया। इसके बाद छात्र को नई मार्कशीट दे दी गई। सिंडिकेट की स्वीकृति के बाद तत्कालीन उप कुलपति कांता आहूजा ने पहाड़िया के खिलाफ 28 सितम्बर 1999 को मुकदमा चलाने की अभियोजन स्वीकृति दी थी।

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