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ग्रीष्मावकाश आया तो 24 हजार पंचायत सहायकों को लगा दिया पंचायतों में, फिर जाएंगे स्कूलों में

3 वर्ष पहले
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राज्य में ये 24 हजार ग्राम पंचायत सहायक अनूठी सरकारी नौकरी कर रहे हैं। 6 हजार रुपए मानदेय, अस्थायी नौकरी, काम दो सरकारी कार्यालयों में। नियुक्ति ग्राम पंचायतों में हुई, बाद में स्कूलों में लगाया। अब स्कूलों में ग्रीष्मावकाश शुरु हुआ तो दोबारा लगा दिया पंचायतों में। जैसे ही स्कूल खुलेंगे, ये पंचायतों से फिर लौटेंगे स्कूलों में।

राज्य सरकार ने विद्यार्थी मित्रों से किए गए वादे को पूरा करने के लिए पिछले साल ग्राम पंचायत सहायकों की भर्ती की। इन पदों पर अरसे से स्कूलों में सेवारत विद्यार्थी मित्र चयनित हुए। नियुक्ति के समय ग्राम पंचायत सहायकों का कार्यस्थल प्रदेश में विभिन्न ग्राम पंचायत मुख्यालयों को रखा गया। कुछ समय बाद इनका कार्यस्थल बदलकर संबंधित पदेन पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (पीईईओ) के अधीन कर दिया गया। इसके बाद से वे पीईईओ के अधीन लगातार काम कर रहे हैं। स्कूलों में 10 मई से 19 जून तक ग्रीष्मावकाश शुरु हो गया है। ऐसे में शिक्षा विभाग नहीं चाहता कि ये भी अन्य कार्मिकों की तरह ग्रीष्मावकाश का लाभ उठाएं। ऐसे में अब पंचायत सहायकों को स्कूलों से फिर से ग्राम पंचायतों में काम करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। स्कूल जैसे ही खुलेंगे, ये फिर से पीईईओ के अधीन आ जाएंगे।

पंचायत सहायकों की नियुक्ति संविदा आधारित है। ऐसे में ग्रीष्मावकाश के डेढ़ माह के दौरान इनकी सेवा ग्राम पंचायतों में ली जाएंगी। यह उच्च स्तर का फैसला है। - जगदीश नारायण जाट, सेक्शन ऑफिसर, स्कूल शिक्षा

नियुक्ति के आदेश पंचायतीराज विभाग से पंचायत सहायकों को लगाने के लिए पंचायतीराज विभाग एवं स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर दो से तीन पंचायत सहायकों को लगाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। ग्राम पंचायत सहायकों की चयन की जिम्मेदारी विद्यालय की एसडीएमएसी कमेटी को दी गई थी। नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं कक्षा उत्तीर्ण है। अब शिक्षा विभाग आदेश जारी कर इनकी ड्यूटी ग्राम पंचायतों में लगा रहा है।

सवाल ये भी?

राजस्थान हाईकोर्ट के एडवोकेट संदीप कलवानिया का कहना है कि भले ही पंचायत सहायक नियमित नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इनके लिए कोई नियम-कायदे बनाए ही न जाएं। इनके लिए किसी प्रकार की छुटिट्यों का प्रावधान ही नहीं है। इनके एक साल की सेवा विस्तार भी पीईईओ की अनुशंसा पर निर्भर करेगा।

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