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रोबोटिक नी-रिप्लेसमेंट सर्जरी में कम होता है ब्लड लॉस और रिकवरी पीरियड

3 वर्ष पहले
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जॉइंट रिप्लेसमेंट के लिए लेटेस्ट रोबोटिक सर्जरी से एक्यूरेसी और परफेक्शन के साथ ट्रीटमेंट किया जा रहा है। इसमें सर्जरी में गलती की संभावना नगण्य होती है। खासकर 30 से 40 साल की एज ग्रुप के एक्टिव पेशेंट्स में टोटल नी रिप्लेसमेंट करने से बेहतर है कि घुटने के एक चौथाई हिस्से को रिप्लेस किया जाए। इससे ब्लड लॉस और दर्द कम होता है और रिकवरी भी बेहतर होती है। सर्जरी के दूसरे ही दिन पेशेंट घर जा सकता है। वहीं 80 साल से ज्यादा उम्र के ऐसे पेशेंट्स जिनके हार्ट और लंग्ज हेल्दी हैं, में भी टोटल नी रिप्लेसमेंट रिस्की होती है। इसलिए पार्शियल नी-रिप्लेसमेंट बेहतर विकल्प है। लोग सोचते हैं कि रोबोटिक सर्जरी में रोबोट पूरी सर्जरी करता है लेकिन ऐसा नहीं है। इसमें एक रोबोटिक आर्म होती है जिसमें पेशेंट की डिटेल के डेटा फीड किया जाता है। रोबोटिक अार्म की मदद से सर्जन नी रिप्लेसमेंट करता है जो कि बिल्कुल सटीक होती है। इसमें 1 एमएम का भी फर्क नहीं होता। साथ ही पेशेंट के लिगामेंट बैलेंस के मुताबिक सर्जरी को हैंडक्राफ्ट किया जाता है। प्रक्रिया के दौरान घुटने के सिर्फ प्रभावित हिस्से को रिप्लेस किया जाता है। आसपास की हेल्दी बोन और टिश्यू को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।

प्रक्रिया से पहले सर्जन घुटने को डिजिटल कम्प्यूटेड टोमोग्राफी से स्कैन करते हैं जिससे वो इंप्लांट की सटीक जगह पहचान पाते हैं। रोबोटिक आर्म की मदद से इंप्लांट लगाने से पहले आसपास की बोन को शेप किया जाता है। रियल टाइम वीडियो इमेज की मदद से सर्जन उस जगह को नेवीगेट कर सकते हैं जो आसानी से दिखाई नहीं देती। फिलहाल अमेरिका की नेवियो रोबोटिक आर्म का यूज किया जा रहा है जो कि इंडिया में सिर्फ चार जगह ही काम में ली जा रही है। करीब डेढ़ साल पहले यह टेक्नीक इंडिया में आई और अभी जयपुर में इसका इस्तेमाल कर घुटनों की परेशानी वाले पेशेंट को दर्द से राहत दी जा रही है।

हैल्थ

डॉ. अनूप जुरानी

जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन

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