लीगल रिपोर्टर.जयपुर | हाईकोर्ट ने दौसा नगर परिषद के चेयरमैन राजकुमार जायसवाल के खिलाफ 3 जनवरी 2018 को पारित किए गए अविश्वास प्रस्ताव को रद्द कर दिया है। साथ ही अदालत ने चेयरमैन व वाइस चेयरमैन अविश्वास प्रस्ताव के तहत उस प्रावधान को अवैध माना है जिसमें योग्य सदस्य की परिभाषा में निर्वाचित सदस्यों को ही मतदान करने का योग्य माना था।
न्यायाधीश एम.एन.भंडारी व डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह आदेश राजकुमार जायसवाल की याचिका पर दिया। हालांकि अदालत ने राज्य सरकार को इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए समय देते हुए आदेश 15 दिन के लिए स्थगित कर दिया। वहीं अदालत ने अविश्वास प्रस्ताव के बाद निर्वाचित हुए चेयरमैन मुरली मनोहर शर्मा की मामले में पक्षकार बनाने संबंधी प्रार्थना पत्र को भी खारिज कर दिया।
अधिवक्ता आरबी माथुर ने बताया कि याचिका में प्रार्थी के खिलाफ पारित किए गए अविश्वास प्रस्ताव और चेयरमैन व वाइस चेयरमैन अविश्वास प्रस्ताव नियम -2017 के नियम 2 (b) को चुनौती दी गई। याचिका में कहा कि नए नियमों के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव में केवल नगर परिषद के निर्वाचित सदस्यों को ही शामिल किया गया है। जबकि 2007 के नियमों में एमएलए व एमपी को एक्स ऑफिसियो मैंबर्स माना है। अविश्वास प्रस्ताव में एमएलए व एमपी की गैर मौजूदगी में मतदान हुआ है जो गलत है। सुनवाई के दौरान मौजूदा चेयरमैन मुरली मनोहर शर्मा ने मामले में पक्षकार बनने का प्रार्थना पत्र दायर करते हुए कहा कि वे इस मामले में प्रभावित पक्षकार हैं और इस मामले में कोई आदेश हुआ तो उनके हित भी प्रभावित होंगे। इसलिए उन्हें मामले में पक्षकार बनाया जाए। लेकिन अदालत ने उनके पक्षकार बनाने संबंधी प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।