जयपुर। जलदाय विभाग के नागौर जोन में 4000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का काम देख रहे रिटायर्ड चीफ इंजीनियर महेश करल को रिटायरमेंट के बाद दुबारा वहीं नियुक्ति दे दी गई है। सरकार ने करल को एक साल के लिए पे -माइन्स पेंशन पर दुबारा लगाया है। नागौर क्षेत्र में चल रहे प्रोजेक्ट पर ठेकेदार फर्म धीमी गति से काम कर रहे है और उन पर 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की पेनल्टी लगाने पर फैसला होना है। पेनल्टी लगाने व माफ करने का मामला पहले एसीबी की कार्रवाई के कारण अटक गया था। अब एलडी पर सकारात्मक फैसला करने का दबाव है। वहीं चीफ इंजीनियर पोस्ट पर रि-अपॉइंटमेंट होने से करीब 10 इंजीनियरों के प्रमोशन पर असर पड़ेगा। ऐसे इंजीनियर एसोसिएशन भी इसके खिलाफ है। इस मामले में जलदाय मंत्री सुरेंद्र गोयल व जलदाय विभाग के प्रमुख सचिव रजत मिश्रा ने कोई जवाब नहीं दिया। नागौर लिफ्ट केनाल प्रोजेक्ट फेज- प्रथम व द्वितीय के करीब 14 टेंडर पर काम हो रहे है। यह प्रोजेक्ट करीब 4000 करोड़ के है तथा लंबे समय से चल रहे है। पहला फेज 1194 करोड़ व दूसरा फेज 2938 करोड़ का है। पहले नागौर लिफ्ट केनाल प्रोजेक्ट का चीफ इंजीनियर अजमेर के अधीन था, लेकिन अक्टूबर 2015 में इसे नागौर शिफ्ट करते हुए चीफ इंजीनियर महेश करल को लगा दिया। इसके बाद से वे लगातार वहीं लगे हुए है। हालांकि ग्रेजुएशन इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (गीयर) ने इसका विरोध किया है। उनका मानता है कि चीफ इंजीनियर स्तर पर कार्यकाल बढ़ाने व दुबारा नियुक्ति से एडिशनल चीफ इंजीनियर, अधीक्षण अभियंता, एक्सईएन, एईएन व जेईएन तक प्रमोशन प्रभावित होते है। ऐसे में दुबारा नियुक्ति नहीं होनी चाहिए।
जलदाय विभाग के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर महेश करल का कहना है कि मुझे सरकार ने पे माइन्स पेंशन पर दुबारा चीफ इंजीनियर नागौर प्रोजेक्ट पर लगाया है। प्रोजेक्ट का काम सुचारू किया जा रहा है।