जयपुर | ‘रोजा सिर्फ भूख-प्यास से जुड़ा फर्ज नहीं है, बल्कि पूरे जिस्म, सोच व रूह को अल्लाह के हुक्म के मुताबिक बिताना रोजा है। इसीलिए रोजा पूरे आदाब के साथ रखना चाहिए।’ रमज़ानुल मुबारक के पहले जुमे की नमाज के दौरान इमाम मुफ्ती अमजद अली ने अपनी तकरीर में यह बात कही। उन्होंने जुमे की नमाज अदा करवाई और नमाज के बाद खुदा की बारगाह में हाथ उठाकर दुआएं मांगी। मस्जिद में जगह नहीं होने के कारण बाहर शामियाना लगाया गया था। मुफ्ती अमजद अली ने बताया कि रमजान की एक निफ्ल 11 महीने के फर्ज के बराबर है। रोजेदार ही रोजे में दूसरों की भूख और प्यास को महसूस करते हैं। पानी की प्यास ही कराती है इसके बहुमूल्य होने का अहसास और दिलाती है पानी के बचाने का संकल्प।
सभी रोजेदार भास्कर के जलमित्र...क्योंकि प्यास ही कराती है पानी के बहुमूल्य होने का अहसास...और दिलाती है पानी बचाने का संकल्प
41.4 डिग्री तापमान : 15 घंटे से ज्यादा लंबा रोजा
जयपुर। जौहरी बाजार जामा मस्जिद परर जुम्मे की पहली नमाज अदा करते रोजेदार।
पहले तरावीह, फिर तड़के सेहरी, दिनभर इबादत और शाम को सूरज डूबने के बाद इफ्तार। रमजान के मुबारक महीने की शुरुआत मस्जिदों, घरों में इसी अंदाज में हुई। सुबह सूरज उगने से पहले रोजेदारों ने सेहरी की और खुदा की बारगाह में नीयत करके रोजा रखा। दिनभर में मस्जिदों में नमाजियों की मजमा रहा, हर नमाज में रोजेदारों की खासी भीड़ रही, साथ ही कुरआन की तिलावत करने और तस्बीह पढ़ने वालों की भी तादाद भी खासी रही। उसके बाद शाम को इफ्तारी की तैयारी हुई और घरों व मस्जिदों में इफ्तारी के दस्तरख्वान सजाए गए। लोगों ने पहले रोजा कुबूल होने की दुआ मांगी और फिर खजूर से रोजा खोला। पूरे महीने यह सिलसिला जारी रहेगा। उधर, मस्जिदों में इस अवसर पर सामूहिक रोजा इफ्तार के कार्यक्रम हुए, जहां सैकड़ों रोजेदारों ने एक ही दस्तरख्वान पर खजूर के साथ इफ्तार किया और मगरिब की नमाज अदा की। उधर, रात में इशा की नमाज के बाद तरावीह की विशेष नमाज अदा की गई।
रोजा, उपवास, व्रत रखने से कैसे होती है पानी की बचत
जल विशेषज्ञ अनिल मेहता का कहना है कि शरीर के बायोलिजिकल सिस्टम को ठीक रखने के लिए कम सेे कम 2 लीटर पानी चाहिए। रोजा, उपवास और व्रत में वे दो लीटर पानी की बचत करते हैं। लेकिन इससे भी ज्यादा कम भोजन करने से पानी बचता है। एक रोटी कम खाने से पानी की बचत होती है। क्योंकि गेहूं के उत्पदन से लेकर रोटी बनने तक 40 लीटर पानी खर्च होता है। जो भी खाद्य सामग्री बचती है। पानी बचता है। अन्य खाद्य सामग्री में भी इतना ही पानी खर्च होता है।