रमजान मुबारक के खास आमाल रोजा, तरावीह, तिलावते कुरआन, जिक्रे इलाही, दुआ, दुरूद शरीफ, इस्तगफार हैं, इनका खास अहतिमाम किया जाए। इस सरापा नूर महीने में जिस कदर नूरानी आमाल किए जाएं, उसी तरह रूह में पाकीजगी और दिल में नूरानियत पैदा होगी। हदीस में है कि जो शख्स रोजे की हालत में झूठ बोलने से परहेज नहीं करता, परवरदिगार को उसके भूखा-प्यासा रहने की कोई जरूरत नहीं है। - मुफ्ती मुहम्मद जाकिर, मुफ्ती शहर जयपुर
पूरे साल फरिश्ते लानत भेजते हैं- हुजूर सल्ल. ने फरमाया कि जब तक रमजान की अजमत बरकरार रहेगी, उम्मत जलील न होगी। किसी शख्स ने अर्ज किया कि किसी शख्स ने रमजान में हराम काम किया, बुरा अमल किया, शराब पी, जिना किया, अगले रमजान तक पूरे साल फरिश्ते उस पर लानत भेजते रहेंगे, वह अगले रमजान से पहले मर जाए अल्लाह के यहां उसकी कोई नेकी नहीं होगी। - मुफ्ती अब्दुल सत्तार साहब, मुफ्ती शहर अहले सुन्नत
ऐ ईमान वालों तुम पर रोजा फर्ज किया गया जिस तरह तुम से पहली उम्मतों के लोगों पर फर्ज किया गया। इस उम्मीद पर कि तुम रोजे के जरिये मुत्तकी बन जाओ (अल-बकर)। शरीअते इस्लाम में रोजा यह है कि आप सुबह सादिक से गुरुब आफताब तक खाने पीने और शहवते नफसानी के पूरा करने से रुके रहें। - खालिद उस्मानी, चीफ काजी, राजस्थान