जवाहर कला केंद्र का कृष्णायन अाॅडिटाेरियम। समय शाम के चार बजे का। अाॅडिटाेरियम की स्टेयर्स पर लगे कालीन में तीन तरफ दर्शकाें का जमावड़ा अाैर बीच में उनसे अात्मीयता का रिश्ता कायम करते नाटक के कलाकार। ये दृश्य था जयरंगम इनिशियेटिव, दी अाेपन स्पेस साेसायटी अाैर कलंदर संस्था की अाेर से अायाेजित नाट्य संध्या में बादल सरकार के थर्ड थिएटर का। इस विधा के विशेषज्ञ रंगकर्मी प्रणब मुखर्जी के निर्देशन में अायाेजित ये प्रस्तुति बादल सरकार के थर्ड थिएटर यानि तीसरा रंगमंच शैली पर अाधारित थी। इसमें प्रणब ने दर्शकों और कलाकारों को साथ-साथ बिठाकर दर्शकों को भी पात्र के रूप में विकसित किया जिससे नाटक से दर्शकाें का जुड़ाव अाैर अात्मीय हाे गया। ये प्रस्तुति डर पर ही अाधारित थी। इस नाट्य संध्या में अायाेजित हुई दाे अन्य प्रस्तुतियां भी डर थीम पर ही अाधारित थीं। जयरंगम की अाेर से रुचि भार्गव अाैर हेमा गेरा ने बताया कि ये नाट्य प्रस्तुतियां पिछले दिनाें अायाेजित 15 दिवसीय वर्कशाॅप में तैयार करवाई गई थीं।
ये प्रस्तुतियां रहीं खास
संध्या में इसके बाद माइम अाैर पपेट्री की रचनाएं भी प्रस्तुत की गईं। इसमें पार्था प्रीतम पॉल अाैर जयपुर की पूजा भार्गव के निर्देशन में पपेट्री तथा कुणाल माेटलिंग अाैर जयपुर के अनुरंजन शर्मा के निर्देशन में माइम की प्रस्तुतियां हुईं। पपेट्री अाधारित प्रस्तुति में चार से नाै साल के बच्चे एक मछली के परिवार द्वारा तालाब में समाए शिकारी के डर काे खत्म करने की कहानी सुनाई जबकि माइम अाधारित प्रस्तुति में इनसान के अस्तित्व में अाने से लेकर वर्तमान तक डर के अलग-अलग प्रकाराें से रूबरू हाेने की कहानी काे इशाराें-इशाराें में जीवंत किया गया।