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मच्छर काटने से ही नहीं, सर्जरी में वैसल्स फटने से भी होती है एेलैफेन्टाइटिस

3 वर्ष पहले
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हैल्थ रिपोर्टर जयपुर



बॉडी की लिम्फेटिक वैसल्स में रुकावट आने के कारण एेलैफेन्टाइटिस (हाथी की तरह पैर का सूजना) बीमारी अक्सर होती है। इस बीमारी में वैसल्स में बहने वाला सफेद फ्लूड एक जगह इकट्ठा होने से पैरों में सूजन आना शुरू हो जाता है। हालांकि,अक्सर यह बीमारी मच्छर काटने से फैलने वाले पैरासाइट्स और इंफैक्शन की वजह से होती है। लेकिन सर्जरी के दौरान वैसल्स फटने और ब्रेस्ट कैंसर में िलम्फनोड्स निकालना भी इसके रिस्क फैक्टर हैं। ब्रेस्ट कैंसर में सर्जरी करने के दौरान लिम्फनोड्स पूरी तरह से हट जाते हैं। इससे हाथों में एेलैफेन्टाइटिस होता है। इसमें हाथ में बहुत ज्यादा सूजन आने से यह भारी हो जाता है। सूजन की वजह से भारीपन आने के कारण हाथ टाइट महसूस होता है। काम करने में परेशानी होती है। इसी तरह पैरों में यह इंफेक्शन होने पर चलना मुश्किल हो जाता है। पैरों में दर्द रहने के साथ-साथ स्किन खराब होने पर पानी निकलना शुरू हो जाता है।

कैसे डायग्नोस करते हैं

लिम्फ फेजियोग्राम और सीटी लिम्फ फेजियोग्राम से डायग्नोस कंफर्म कर सकते हैं। इसके अलावा ब्लड टैस्ट के जरिए ब्लड में पैरासाइट्स की मौजूदगी डायग्नाेस होती है। रात में ये मच्छर ज्यादा एक्टिव होते हैं, इसलिए ब्लड टैस्ट रात में लिया जाना चाहिए। पैरासाइट्स को डिटेक्ट करने के लिए अल्टरनेटिव टैस्ट किए जाते हैंं, लेकिन रिपोर्ट निगेटिव होती है। शुरूआती इंफेक्शन के कई साल बाद लक्षण डवलप होते हैं।

ट्रीटमेंट

अभी तक कोई मेडिसन नहीं है। ब्लड से एक्टिव इंफेक्शन खत्म करने के लिए दवाइयां दी जाती हैं। ये दवाइयां दूसरे लोगों में फैलने से रोकती हैं, लेकिन पैरासाइट्स को खत्म नहीं कर पाती हैं। बीमारी की वजह ठीक करना जरूरी है। करेक्टिव सर्जरी मदद कर सकती है।

अन्य रिस्क फैक्टर : मच्छर काटने से उशेरिया बैन्क्रॉफ्टी इंफेक्शन होने पर फीवर और लिम्फनोड्स गांठें बन जाती हैं। समय पर ठीक नहीं किए जाने पर क्रॉनिक में तब्दील हो जाती हैंै। ऐसे में लिम्फोटिक वैसल्स खराब होने पर यह बीमारी हो जाती है।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक

120

मिलियन लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं

कब आते हैं लक्षण

इस बीमारी में लिम्ब, ब्रेस्ट और जेनेटाइल हिस्से में सूजन रहना। मच्छर के काटने पर इस बीमारी के लक्षण नहीं आते हैं जब तक िलम्फ सिस्टम और किडनी डैमेज नहीं हो पाती है। पैर, बाहें, ब्रेस्ट अौर जेनेटाइल में सूजन रहना। इसमें लिम्फ सिस्टम में डेमेज आने से इम्युन सिस्टम कमजोर होता है। स्किन पर बैक्टीरियल इंफेक्शन बढ़ने से स्किन ड्राई और मोटी हो जाती है। इनमें बार-बार इंफेक्शन होना सामान्य हैं। बार-बार बैक्टीरियल इंफेक्शन में फीवर होना भी शामिल हैं।

-डॉ. पुनीत सक्सेना, फिजिशियन, जयपुर

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