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बच्चे की मसल्स का नीला पड़ना और ब्लीडिंग होना हीमोफीलिया का लक्षण

3 वर्ष पहले
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हैल्थ रिपोर्टर जयपुर



बच्चे में खून का थक्का नहीं बनने के कारण ब्लीडिंग हो रही है। यह ब्लीडिंग एक विशेष हिस्से में नहीं बल्कि किसी भी हिस्से में शुरू हो चुकी है। मांसपेशियों और ज्वाइंट्स में ब्लीडिंग होने से ये नीला पड़ रही है। बच्चों में आने वाले इन लक्षणों को अवॉइड नहीं करें। यह हीमोफीलिया बीमारी भी हो सकती है। इस बीमारी में ज्वाइंट्स में सूजन आने के साथ खून भी निकलता है। इस बीमारी का अभी कोई स्थायी इलाज नहीं है।

दो घंटे में प्रोटीन सेक्टर का इंजेक्शन नहीं देने पर बच्चा हो सकता है अपंग

यह बीमारी बच्चे में प्रोटीन सेक्टर-8 और सेक्टर-9 की कमी होने पर होता है। यह प्रोटीन एक तरह से ब्लड का कम्पोनेट हैं। ब्लीडिंग शुरू होने के दो घंटे के अंदर बच्चे को ये सेक्टर चढ़ाना जरुरी है। ये सेक्टर इंजेक्शन के जरिए देते हैं। इससे ब्लीडिंग रुकना बंद होती है। वहीं, खून का थक्का बनना शुरू होता है। वेस्टर्न में सप्ताह में तीन बार सेक्टर देते हैं, लेकिन इंडिया में यह इलाज महंगा होने के कारण खून निकलने पर ही सेक्टर लगाते हैं। सेक्टर एक तरह का ब्लड कंपोनेट है। जिन ज्वाइंट्स से ब्लड निकल रहा है। उन जॉइंट्स में दो घंटे के अंदर सेक्टर नहीं लगाने से नुकसान पहुंचता है। यदि समय पर सेक्टर नहीं दिए जाएं तो साेलह साल की उम्र तक बच्चा अपंग हो सकता है। ये सेक्टर लगाए जाने के साथ-साथ फिजियोथेरेपी दी जाएं। ताकि जाॅइंट्स और मसल्स मजबूत बने। मसल्स मजबूत बनने पर खून निकलने की संभावना कम होगी। अब इस बीमारी के इलाज के लिए जीन थेरेपी पर रिसर्च चल रही है। दस हजार में से एक बच्चा इस बीमारी से ग्रसित है। लड़कियां इस बीमारी की करियर है।

डॉ. कपिल गर्ग

पीडियाट्रिशयन, जयपुर

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