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टीबी और ट्यूमर भी गर्दन में दर्द होने के बड़े रिस्क फैक्टर

3 वर्ष पहले
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हैल्थ रिपोर्टर जयपुर



गलत पॉश्चर और कंप्यूटर पर लगातर काम से गर्दन में दर्द सामान्य प्रॉब्लम बन चुकी है। कमर डिस्क की तरह गर्दन में भी सरवाइकल डिस्क होती है। ये डिस्क सी 1 वर्टीब्रा से लेकर सी7 वर्टीब्रा तक होती हैं। वहीं, स्पाइनल कि हर दो हडि्डयों के बीच से एक नर्व निकलती है, जो पूरी बॉडी को सप्लाई करती है। इतना ही नहीं, इन नर्व का सीधा कनेक्शन सिर से भी होता है। इन नर्व में प्रॉब्लम होने से गर्दन में दर्द हाेते हुए सिर तक पहुंच जाता है। हर उम्र में इस दर्द के अलग-अलग कारण होते हैं।

हडि्डयों के कमजोर होने और गलत पॉस्चर में काम करने से आता है गर्दन में दर्द, मसल्स रिलेक्स करने के लिए आइस थैरेपी लें

छोटे बच्चों में गर्दन दर्द के कारण

जन्मजात बीमारियां, टीबी और अन्य इन्फैक्शन, इंजरी, ट्यूमर।

क्या है बचाव : प्रेग्नेंसी में एंटी-नेटल चैकअप रेगुलर रखना चाहिए। उनका इम्युनाइजेशन प्रॉपर तरीके से करवाएं। प्रेग्नेंसी में अच्छी डाइट लें और इंजरी से बचें।

एडल्ट्स में गर्दन दर्द के कारण

पॉश्चर प्रॉब्लम, इंजरी, डिस्क प्रॉब्लम, गठिया का दर्द, तनाव, इन्फैक्शन, ट्यूमर।

कैसे बचें : ज्यादातर महिलाएं घर से बाहर जाकर एक्सरसाइज नहीं करती हैं। जानकारी नहीं होने से वे गलत पॉश्चर में काम करती रहती हैं। इससे उनकी मसल्स फटिक होने से दर्द बढ़ना शुरू हो जाता है। दर्द से बचने और कंट्रोल करने के लिए रेगुलर एक्सरसाइज और वॉक करें। आरामदायक तकिया और हार्ड मेट्रेस का इस्तेमाल करें। इससे गर्दन का तनाव कम होने पर दर्द में रिलीफ मिलेगा। वहीं,जॉब करने वाली महिलाओं में कंप्यूटर पर लगातार देखने की वजह से गर्दन में दर्द होता है। इससे बचने के लिए हर 45 मिनट के बाद ब्रेक लेना चाहिए।

ओल्ड एज में गर्दन दर्द के कारण

हडि्डयों का कमजोर होना, ट्यूमर।

एक्यूट पेन में नहीं करें एक्सरसाइज

गर्दन में ज्यादा दर्द होने पर एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए। पहले दर्द को रेस्ट और दवाई से ठीक करें। इसके बाद एक्सरसाइज करें।

ट्रीटमेंट

एक्यूट पेन में कारण का पता लगाकर दर्द को दूर किया जाता है। पेशेंट के हीलिंग स्टेज में आने पर उसे एक्सरसाइज करवाई जाती है। मसल्स रिलैक्स करने के लिए आइस थैरेपी की तरह अन्य थैरेपी भी देते हैं। दर्द में रिलीफ नहीं मिलने पर इंजेक्शन देते हैं। अगर पेशेंट को इन सबसे रिलीफ नहीं मिल रहा है तो आखिर में सर्जरी की जाती है।

-डॉ. सुनील गोयंका,

रीहैबिलिटेशन एक्सपर्ट, जयपुर

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