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फ्रैक्चर में हड्डी जोड़ने के लिए पीआरपी और ग्रोथ फैक्टर ज्यादा असरदार

3 वर्ष पहले
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हैल्थ रिपोर्टर जयपुर



पिछले बीस सालों में ऑर्थोपेडिक्स सर्जरी में बड़ा बदलाव आया है। ट्रीटमेंट के तरीके बदलने से अर्ली मोबलाइजेशन और अर्ली बैक टू वर्क का कंसेप्ट आ रहा है। इसमें पेशेंट्स को सर्जरी के बाद जल्द से जल्द चलना शुरू करवाया दिया जाता है, ताकि वे कुछ ही दिनों में ऑफिस जॉइन कर पाएं। इसी मुद्‌दे पर एसएन मेडिकल कॉलेज जोधपुर के आॅर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंट में सीनियर प्रोफेसर डॉ. अरुण वैश्य से सवाल-जवाब...

फ्रैक्चर होना सामान्य समस्या है। हड्ढी जोड़ने के लिए आजकल क्या टेक्नोलॉजी अपनाई जा रही है?

फ्रैक्चर में हड्डी को मजबूती से जोड़ने के लिए मरीज का हैल्दी होना जरूरी है। बॉडी में कैल्शियम की मात्रा अच्छी होनी चाहिए। पेशेंट्स को डायबिटीज और ब्लड प्रेशर नहीं होना चाहिए। आजकल सर्जरी से हड्डियों को जोड़ा जाता है। हड्डी नहीं जुडने पर पीआरपी और बीएमपी का इस्तेमाल करते हैं, साथ ही ग्रोथ फैक्टर और प्रोटीन भी देते हैं।

सर्जरी में किस तरह की टेक्निक अपना रहे हैं?

अब बड़े चीरे नहीं लगाए जाते है। मिनिमल इंवेजिव टेक्निक से सर्जरी शुरू हो चुकी है। टेलीविजन की स्क्रीन पर देखते हुए छोटे-छोटे छेद करके रॉड और प्लेट्स लगाते हैं ताकि पेशेंट्स की रिकवरी फास्ट हो पाएं।

किस तरह के इम्प्लांट लगाना ज्यादा फायदेमंद है़?

आजकल लेटेस्ट इम्प्लांट आ चुके हैं। मैटल के बजाय टाइटेनियम के इम्प्लांट ज्यादा फायदेमंद हैं। इन इम्प्लांट को लगाने के बाद एमआरआई की जा सकती है। इसके अलावा पीक मैटेरियल से बने इम्प्लांट आ चुके हैं। ये बॉडी फ्रेंडली इंप्लांट हैं।

रिप्लेसमेंट में क्या नई टेक्नोलॉजी आ चुकी है?

कंप्यूटर नैविगेशन से घुटने के साइज के आधार पर कट लगाया जाता है। इससे आर्टिफिशियल नी बिल्कुल परफेक्ट लगता है। आजकल एंडोस्कॉपी से लिगामेंट सर्जरी की जा रही है।

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