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कैंसर सर्जरी में रिमूव के बाद 11 महिलाओं की ब्रेस्ट रि-कंस्ट्रक्ट

3 वर्ष पहले
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जयपुर | ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी के बाद अभी 100 फीसदी महिलाएं ब्रेस्ट रिमूव करा लेती हैं। जबकि जरूरत 65 से 70 फीसदी महिलाओं की होती हैं। ब्रेस्ट रिमूव के बाद महिलाएं काफी मानसिक तनाव में रहती हैं क्योंकि न केवल परिवार बल्कि समाज में भी उन्हें रहने के लिए खुद का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। ऐसे में कई महिलाएं तो डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं। इसीलिए ब्रेस्ट रि-कंस्ट्रक्शन बहुत जरूरी हो गया है। जयपुर के भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल में अब तक 11 महिलाओं का सफल ब्रेस्ट रि-कंस्ट्रक्शन किया जा चुका है और ये महिलाएं अब पूरी तरह से सामान्य सामाजिक जीवन जी रही हैं। इन महिलाओं का कहना है कि न केवल सुंदरता बल्कि बिना किसी तनाव के समाज का एक हिस्सा बने रहने के लिए यह जरूरी है। भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल के आेंको सर्जन डॉ. अनिल गुप्ता बताते हैं- 35 साल से कम की महिलाओं में सबसे अधिक होने वाली बीमारी ब्रेस्ट कैंसर बन गई है। इलाज के लिए ब्रेस्ट रिमूव कर सर्जरी भी की जा रही है। लेकिन कैंसर फिर से नहीं हो, इस डर की वजह से सभी पीड़ित महिलाएं पूरी ब्रेस्ट ही रिमूव करा लेती हैं। जबकि 60-65 फीसदी महिलाओं को ही पूरा ब्रेस्ट रिमूव की जरूरत होती है।

कैसे करते हैं

प्लास्टिक एंड रि कंस्ट्रक्टिव माइक्रो वेस्कुलर सर्जन डॉ. उमेश बंसल ने बताया कि ऑटोलोगस डीआपीई तकनीक से ही ब्रेस्ट रि-कंस्ट्रक्शन किया जाता है। इसमें एब्डोमनल बैली (नाभि के नीचे का हिस्सा) व कमर की तरफ से फेट लिया जाता है। इसे ब्रेस्ट पर सर्जरी कर लगाया जाता है। करीब पांच से छह घंटे की सर्जरी के बाद रि-कंस्ट्रक्शन हो जाता है। इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं बल्कि यदि किसी महिला का वजन अधिक है तो उसका फेट भी कम हो जाता है।

यह करें तो बेहतर होगा

डॉक्टर का कहना है कि यदि सर्जरी के दौरान ही रि-कंस्ट्रक्शन कराया जाए तो मरीज का एक ही सर्जरी में दोनों फायदे हो सकते हैं। दोबारा सर्जरी कराने में न केवल खर्च बढ़ता है बल्कि अस्पताल में भी आठ दिन भर्ती रहना पड़ता है। इसलिए कैंसर सर्जरी के दौरान ही पेशेंट अवेयरनेस जरूरी है और डॉक्टर्स को भी इसके लिए मरीजों को प्रोत्साहित करना चाहिए। जयपुर में जहां इसका खर्च अधिकतम डेढ़ लाख रुपए है वहीं मुम्बई और दिल्ली में इसके पांच लाख रुपए तक लिए जा रहे हैं।

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