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पीआरएन से आए लोगों के लिए जेडीए के गेट बंद, परनामी के साथ आए जवाहर नगर वालों के लिए एसी रूम खोला

3 वर्ष पहले
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जेडीए में शुक्रवार को दो क्षेत्रों से अपनी मांगों को लेकर लोग आए। एक क्षेत्र को जेडीए परिसर के भीतर नहीं घुसने दिया तो दूसरे को जेडीसी के चैंबर के पास एसी ‘चिंतन’ सभागार में बिठाया, जूस भी पिलाया। जिनको बाहर से ही रवाना किया, वो लोग पृथ्वीराज नगर से आए थे। वे 33 दिन से क्षेत्र में बिजली-पानी-सीवरेज जैसे विकास कार्यों की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं। वहां सुनवाई नहीं हुई तो ये जेडीए आए। दूसरी ओर जिन लोगों को पूरी तवज्जो मिली, वो जवाहर नगर कच्ची बस्ती के लोग थे। जिनको अहमियत की वजह साथ में आए बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और स्थानीय विधायक अशोक परनामी थे। जिनकी पहल पर बस्तियों को खाली करवा मौके पर ही फ्लैट बनाकर बसाया जाना है।

33 दिन से विकास की मांग पर धरना दे रहे पृथ्वीराजनगर के लोगों को जेडीए में घुसने तक नहीं दिया, जवाहर नगर कच्ची बस्ती वालों को मौके पर ही बसाने की मांग पर विधायक के साथ पहुंचे लोगों की पूरी आवभगत, जूस िपलाया

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अफसर-मंत्री 33 दिन से बात करने गए ही नहीं

पृथ्वीराज नगर में 33 दिन से धरने पर बैठे लोगों से वार्ता करने न अफसर पहुंचे न मंत्री, जबकि विकास की मांगों पर मानवाधिकार आयोग और कोर्ट गंभीरता जता चुका। इस बीच 41 डिग्री के आसपास तपते सूरज में लोगों का सब्र टूटने लगा। धरने पर बैठे पुरुषों को कामकाज छोड़ गर्मी में बेहाल देख महिला-युवाओं ने विरोध स्वरूप जेडीए तक प्रदर्शन की बात को बल दिया।

जेडीए पहुंचते ही गेट बंद कर दिए गए

लोगों ने जेडीसी से मिलने की बात कही तो अनसुना कर दिया। आखिरकार लोग भड़के और विरोध में गेट पर मटके फोड़े। अगुवाई कर रहे एडवोकेट घनश्याम सिंह व अशोक शर्मा ने विरोध को हिंसक नहीं होने में पूरा सहयोग दिया। इसके बावजूद जेडीसी तो नहीं मिले, बल्कि सोमवार को वार्ता के लिए लिखित में पत्र सौंपने की बात पर वापस कर दिया।

परनामी- बात हो गई, सितंबर से मौके पर काम शुरू कर देंगे

जवाहर नगर बस्ती के 8 हजार से ज्यादा परिवारों को मौके पर ही फ्लैट बनाकर बसाने के लिए तैयारी पूरी है। चार साल इस मसले में चुनावों से ऐन पहले गति आई है। कंसल्टेंसी ली जा रही है। जेडीसी वैभव गालरिया ने परनामी के साथ आए लोगों की सुनवाई के लिए सभी संबंधित अफसर-इंजीनियरों को बुलाया।

बैठक के बाद परनामी ने कहा- काम हमारी प्राथमिकता में है। आज प्रारूप तय हो गया है कि कैसे काम होगा। सितंबर में काम शुरू कर देंगे। इसके लिए जेडीए अपना काम कर रहा है। उधर बस्ती से आए सनातन हाडा ने कहा कि प्रशासन हमारी सुनवाई कर रहा है। मौके पर ही हमको फ्लैट मिलेंगे तो लोगों को सहूलियत होगी।

विरोधाभास यह भी

कच्ची बस्तियों को बसाने में हर सरकार और अफसर जिम्मेदार हैं। लेकिन अब इनको पक्की छत देने में भेदभाव हो रहा है। जेडीए ने बगैर किसी प्लानिंग के 361 करोड़ खर्च कर दिए अब वहां 31 बस्तियों को शिफ्ट करने का दबाव है, जिसका लोग विरोध कर रहे हैं। उधर जवाहर नगर के लोगों को अब मौके पर फ्लैट दिए जा रहे हैं। ये बस्तियां फॉरेस्ट लैंड पर बसी है, जिसके लिए जेडीए वन विभाग को अन्यत्र जमीन देगा।

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