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शास्त्रीय और सूफी संगीत से सराबोर हुआ अल्बर्ट हाॅल

3 वर्ष पहले
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‘वर्ल्ड म्यूज़ियम डे’ पर शुक्रवार काे अल्बर्ट हाॅल पर शहर के युवा कलाकाराें ने शास्त्रीय अाैर सूफी संगीत पेश कर इस दिन काे भारतीय संस्कृति के रंग में रंग दिया। अल्बर्ट हॉल में पुरातत्व और संग्रहालय विभाग द्वारा लीडिंग नोट म्यूजिक एकेडमी के सहयोग से पवन गाेस्वामी, सुषमा मेहता अाैर अमृता माैर्य के संयाेजन में सुरमयी शाम का आयोजन किया गया। आदिल हुसैन ने मांड के साथ राग जोग पर आधारित बंदिश सुनाई, दिशा गोस्वामी ने वॉयलिन पर राग बिहाग, अक्षत शर्मा ने की-बोर्ड पर राग भैरव को खूबसूरती से पेश किया। इनके साथ मेहराज हुसैन ने तबले पर संगत की। मनन मेहता ने पियानो पर संगीतकार बिथोबिन की प्रचलित कम्पोजिशन पर ‘फर अ लिस’ पेश कर सुनने वालों को पश्चिमी शास्त्रीय संगीत की खूबसूरती से रूबरू करवाया।

फिर गूंजा गजल अाैर सूफी संगीत

कार्यक्रम का दूसरा हिस्सा गजल और सूफी रंग से सराबोर रहा। विनायक भट्ट ने गजल ‘रंजिश ही सही’ सुनाई। इसके बाद सुषमा मेहता ने ‘आज जाने की जिद न करो’ को अपने अंदाज में पेश किया। मयंक शर्मा, गौरव, सर्वेश आदि युवा कलाकारों ने अमीर खुसरो के कलाम ‘छाप तिलक सब छीनी’ के साथ ‘तू माने या ना माने दिलदारा’ की प्रस्तुतियों के साथ माहौल को सूफियाना बना दिया। कार्यक्रम के अंत में चिन्मय गोस्वामी ने गिटार पर जन-गण-मन प्रस्तुत किया।

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