पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • जब तक लेखक ठोकर न खायें, तब तक उसका विकास नहीं हो सकता : डॉ. मंगत

जब तक लेखक ठोकर न खायें, तब तक उसका विकास नहीं हो सकता : डॉ. मंगत

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
City Reporter जयपुर

प्रभा खेतान फाउण्डेशन अाैर ग्रासरूट मीडिया फाउण्डेशन की अाेर से मंगलवार की शाम होटल आईटीसी राजपुताना में अायाेजित की जा रही अाखर सीरीज के तहत इस बार राजस्थानी भाषा के साहित्यकार डॉ. मंगत बादल साहित्य प्रेमियों से रूबरू हुए। इनका जन्म सिरसा में 1 मार्च 1949 को हुआ। राजस्थानी साहित्यकार कृष्ण आशु ने कई राेचक सवालाें के जरिए उनके जीवन संघर्ष काे जीवंत किया।

उन्हाेंने संघर्ष को व्यक्तित्व विकास के लिये आवश्यक मानते हुए कहा जब तक लेखक ठोकर न खायें, आत्मवलोकन नहीं करे तब तक उसका विकास नहीं हो सकता है वहीं दूसरी तरफ जिस दिन कवि अपने आपको सम्पूर्ण मान ले तो उस दिन उसके रचना कर्म का भी अंत हो जाता है।

साहित्य प्रेमियों से रूबरू हुए राजस्थानी भाषा के साहित्यकार

दूसरी कक्षा में टीचर ने दी किताब मैने लिख डाली कविता

जब स्कूल में दूसरी कक्षा में था तो अध्यापक ने मुझे शहीद भगत सिंह की किताब पढ़ने को दी पर मैने अगले दिन उनको भगत सिंह पर एक कविता लिखकर अध्यापक को सुनाई जो उन्हें बेहद पंसद आयी।

ये हैं बादल की प्रकाशित पुस्तकें

डॉ. मंगत बादल की प्रमुख रचनाओं में रेत री पुकार (काव्य संकलन), दसमेस (महाकाव्य), मीरां (प्रबन्ध काव्य), सावण सुरंगो ओसरयो (ललित निबन्ध संग्रह), कितणो पाणी (कहानी संग्रह), भेड़ अर ऊन रो गणित (व्यंग्य संग्रह), मत बाँधो आकाश (काव्य संग्रह), शब्दों की संसद (काव्य संग्रह), इस मौसम में (काव्य संग्रह), हम मनके इक हार के (किशोर गीत), कागा सब तन (कहानी संग्रह), अच्छे दिनों की याद में (कहानी संग्रह) आैर अाेसरयाे सम्मिलित है।

पहली किताब 38 की उम्र में, अब तक लिखीं 13 किताबें

पहली किताब 38 साल की उम्र में सन् 1987 में कविता संग्रह ’मत बाँधों आकाश’ थी। कॉलेज द्वितीय वर्ष में डॉ. मंगत बादल ने छात्र राजनीति से प्रेरित होकर छात्र राजनीति पर ’दादा’ नाम की किताब लिखी थी।

खबरें और भी हैं...