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मातृकुंडिया में परशुराम, चित्तौड़ में गोरा-बादल पेनोरमा का शिलान्यास

3 वर्ष पहले
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चित्तौड़गढ़/राशमी | सीएम वसुंधराराजे ने बुधवार को मातृकुंडिया में भगवान परशुराम पेनोरमा और चित्तौड़गढ़ में प्रस्तावित गोरा-बादल पेनोरमा का शिलान्यास किया। सीएम ने मंगलवार को बड़ीसादड़ी में झाला मन्ना पेनोरमा के बाद बुधवार को बेगूं क्षेत्र में शहीद रूपाजी-करपाजी पेनोरमा बनवाने की घोषणा भी की। सीएम बुधवार को निंबाहेड़ा से हेलीकॉप्टर में मातृकुंडिया पहुंची। जहां परशुराम पेनोरमा का शिलान्यास करते हुए सभा को संबोधित किया। राजे ने कहा कि हमने प्रदेश में 38 पेनोरमा बनवाने व करीब 125 धर्मस्थलों के जीर्णोद्धार का काम हाथ में लिया है। पेनोरमा बनाने का उद्देश्य यही है कि आने वाली पीढिय़ां भी हमारे महापुरूषों के बारे में जान सके। राजे ने कहा कि भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना से प्रदेश में 20 लाख और अकेले चित्तौड़ जिले के 50 हजार लोगो को लाभ मिला है। राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण चेयरमैन औकारसिंह लखावत ने 242 साल पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि की प्रति सीएम को भेंट की। स्वागत उद्बोधन विधायक अर्जुनलाल जीनगर ने दिया। यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने आभार जताया। सांसद सीपी जोशी, देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवा आदि जनप्रतिनिधि व अधिकारी मौजूद थे।

125 धर्मस्थलों का जीर्णोद्धार होगा

मातृकुंडिया के विकास पर खर्च होंग 18 करोड़, सड़कों के लिए 8 करोड़ : मुख्यमंत्री के मुख्य सचिव केके पाठक ने बताया कि मातृकुंडिया तीर्थ विकास प्रोजेक्ट पर 18 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके अलावा अलग से 8 करोड़ की सडकें मातृकुंडिया से राजसमंद जिले के जवासिया व गोपालपुरा तक बनाई जाएगी। विकास कार्य दो चरणों में होगा। पहले चरण में 8 करोड़ के टेंडर कर कार्य आरएसआरडीसी कार्यकारी एजेंसी को दे दिया है। इधर, हेलीपेड पर आर्टिस्ट देवीलाल ने सीएम को पेंटिंग कर बनाई गई तस्वीर भेंट की। सीएम ने कलाकार के साथ फोटों खिंचवाए।

परशुराम पेनोरमा : 1.85 करोड़ की लागत : राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के सीईओ टीकम चंद्र बोहरा व देवस्थान आयुक्त जितेन्द्र उपाध्याय ने भास्कर को बताया कि 1.85 करोड़ की स्वीकृति हुई है, जिसमें एक करोड़ भवन निर्माण पर खर्च होंगे। शेष 85 लाख से भगवान परशुराम के जीवन चरित्र व महिमा 2-डी, 3-डी मूर्तियों प्रिंट और गनमेटल की मूर्तियों से दर्शाया जाएगा।

आरटीडीसी होटलों की दरें 2-4 हजार रुपए, साइटों पर दिखा रखा एक लाख तक किराया

टूरिस्ट हो रहे भ्रमित, कार्यशैली पर सवाल

पॉलिटिकल रिपोर्टर. जयपुर | राजस्थान पर्यटन विकास निगम के होटलों का बिजनेस चौपट करने के लिए किस तरह की तरकीब अपनाई जा रही है। यह जानकर आप भी चौंक जाएंगे। विदेशी और प्रदेश के बाहर के पर्यटक आरटीडीसी के होटलों की बुकिंग न करा पाए। इसके लिए इंटरनेट के जरिए आरटीडीसी होटलों का किराया साइटों पर 10 हजार से लेकर एक लाख रुपए दिखा रखा है। असल में उन्हीं आरटीडीसी होटलों का किराया 1500 रुपए लेकर चार हजार रुपए ही है। इसकी सूचना होने के बावजूद आरटीडीसी प्रबंधन की ओर से आज तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। इससे आरटीडीसी प्रबंधन और प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो रहा है। आखिर किसके सह पर यह किया जा रहा है? खास यह है कि आरटीडीसी होटल के नीचे प्राइवेट होटलों के नाम और उनके रेट लिस्ट भी आ रहे, जिनका किराया 900 रुपए से लेकर चार से पांच हजार के बीच ही दर्शाया जा रहा है।

गूगल पर किराया ज्यादा दिखने पर प्रभावित हो रही है बुकिंग : सामान्य तौर पर विदेशी या प्रदेश के बाहर से आने वाले पर्यटक इंटरनेट के जरिए होटलों की बुकिंग कराते है। ऐसे में सरकारी होटल सबसे अधिक सर्च किए जाते हैं। प्रदेश के अलग-अलग शहरों के लिए गूगल पर सर्च करते ही आरटीडीसी होटलों के नाम आते हैं, जिनका किराया दो से लेकर तीन सौ गुना अधिक शो होता है। ऐसे में पर्यटक आरटीडीसी होटल बुक कराने का विचार छोड़ देता है। उसके नीचे कम रेट लिस्ट वाले जो होटल होते हैं। उसे बुक करा लेता है। इससे सीधे तौर पर आरटीडीसी होटलों की बुकिंग प्रभावित हो रही है। इसी का नतीजा है कि आरटीडीसी होटलों में पर्यटकों की संख्या कम हो गई है।

इंटरनेट पर आरटीडीसी होटलों के कमरों का किराया बहुत अधिक दिखाया जा रहा है। इसकी सूचना मिली है। इस मामले में आरटीडीसी प्रबंधन कानूनी राय ले रहा है। जल्द ही कोई कार्रवाई की जाएगी। -प्रदीप बोहड़, प्रबंध निदेशक आरटीडीसी

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