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सबसे ज्यादा मरीज एसएमएस में, 16 विभागों में 43 डॉक्टर हुए कम... मरीजों की मुश्किल

3 वर्ष पहले
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प्रदेश में मेडिकल कॉलेज बढ़ाने के लिए डॉक्टरों को “इधर-उधर” करने की चिकित्सा विभाग की रणनीति आमजन को ही भारी पड़ रही है। हमेशा की तरह इस बार भी पांच मेडिकल कॉलेजों में एमसीआई (मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया) के निरीक्षण से पहले एसएमएस मेडिकल कॉलेज से 43 डॉक्टरों को भेज दिया है। भले ही डॉक्टरों को एमसीआई निरीक्षण की खानापूर्ति के बाद फिर से एसएमएस मेडिकल कॉलेज में ही ट्रांसफर कर दिया जाएगा, लेकिन फिलहाल एसएमएस अस्पताल में 16 विभागों में डॉक्टरों की कमी हो गई है। राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल होने के कारण एसएमएस अस्पताल में ही सबसे ज्यादा मरीज आते हैं। एक साथ 16 विभागों के 43 डॉक्टरों के एक साथ जाने से इन मरीजों को इलाज मिलने में दिक्कत हो रही है। डॉक्टर और विभागाध्यक्ष भी इस परेशानी को स्वीकारते हैं, लेकिन आदेशों को नकारना उनके हाथ में नहीं है।

पाली, चूरू, भीलवाड़ा, भरतपुर, डूंगरपुर जिलों में मेडिकल कॉलेज खोले जाने हैं। कॉलेजों को कितनी सीटें आवंटित की जाएं, इसके लिए यहां मापदंडों के आधार पर जांच होनी होती है। पिछले दो सालों में इन कॉलेजों में एमसीआई तीन बार जांच कर चुकी है। हर बार कोई न कोई कमी निकलती है। इस बार भी डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए एसएमएस मेडिकल कॉलेज 43 डॉक्टरों को इन कॉलेजों में लगाया गया है।

रियलिटी चैक

एमसीआई के निरीक्षण से पहले फिर खानापूर्ति के लिए सरकार ने राज्य के सबसे बड़े अस्पताल से पांच नए मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर भेज दिए, इसका असर यह

पांच प्रमुख विभागों से ही 27 डॉक्टर गए...असर तो होना ही है

मेडिसिन और रेडियोथैरेपी के पांच-पांच, एनेस्थीसिया के छह और गायनी के चार-चार और जनरल सर्जरी के तीन डॉक्टर एसएमएस मेडिकल कॉलेज से गए हैं। यानी प्रमुख पांच विभागों के 27 डॉक्टर यहां कम हो गए हैं। एसएमएस मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध अस्पतालों में ही अभी मरीजों की काफी भीड़ रहती है और डॉक्टरों की कमी से यहां आने वाले मरीजों को देख पाना मुश्किल हो रहा है।

जानिए... किस विभाग के कितने डॉक्टर बाहर भेजे गए

मेडिसिन : डॉ. मधुलता अग्रवाल, डॉ. अश्विनी, डॉ. राजेन्द्र कुमार, डॉ. महेश यादव, डॉ. पुनीत सक्सैना।

एनेस्थीसिया : डॉ. चित्रा सिंह, डॉ. एस के भाटी, डॉ. राजीव शर्मा, डॉ. सुनील चौहान, डॉ. महिपाल सिंह, डॉ. निहार शर्मा।

गायनी : डॉ. कुसुमलता मीणा, डॉ. राखी आर्य, डॉ. मोहनलाल मीणा, डॉ. मदन अग्रवाल।

रेडियोथैरेपी : डॉ. आशीष बगडिया, डॉ. योगेश गुप्ता, डॉ. देविका, डॉ. दीपिका, डॉ. दिलीप।

जनरल सर्जरी : डॉ. दिनेश शर्मा, डॉ. आशुतोष पंचोली, डॉ. सुनीता ए.जैन।

ईएनटी : डॉ. महेन्द्र सिंह।

माइक्रोबायोलॉजी : डॉ. नीता पाल, डॉ. एसके सिंह, डॉ. सरोज, डॉ. मधु जैन।

फार्माकोलॉजी : डॉ. चंदन शर्मा।

आर्थो : डॉ. एमसी बंसल, डॉ. एमपी गोयल।

बायोकैमिस्ट्री : डॉ. शकुंतला, डॉ. शालू गुप्ता, डॉ. धर्मवीर यादव, डॉ. रश्मि गुप्ता।

फॉरेंसिक मेडिसिन : डॉ. ध्रुव सिंह।

शिशु रोग विशेषज्ञ : डॉ. धनराज बागड़ी।

रेडियोडायग्नोसिस : डॉ. राघव कुमार, डॉ. सुनील जाखड़।

एनोटॉमी विभाग : डॉ. रिया।

फिजियोलॉजी विभाग : डॉ. जितेन्द्र कुमार गुप्ता।

कोटा मेडिकल कॉलेज से भी हैं छह डॉक्टर

कोटा से मेडिसिन के दो, गायनी, पैथोलॉजी, एनेस्थीसिया और मनोचिकित्सा के एक-एक डॉक्टर को डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज में लगाया गया है।

एमसीआई को भी होती है जानकारी : ऐसा नहीं कि एमसीआई टीम को यह सब जानकारी में नहीं होता, लेकिन वे भी इस खानापूर्ति में शामिल होते हैं। जानकारों का कहना है कि इन कॉलेजों में स्थाई नियुक्तियां की जानी चाहिए।

मरीज परेशान नहीं हों, इसके लिए हम व्यवस्था करते ही हैं। दूसरी जगह मेडिकल कॉलेज खुलें, इसके लिए भी हमें ही देखना होता है। इससे आगे हमें ही फायदा मिलेगा। जब वहां का काम हो जाएगा, तब ये वापस आ जाएंगे। -डॉ. यूएस अग्रवाल, प्रिंसीपल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज

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