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दसवीं की अंकतालिका में दर्ज जन्मतिथि की बजाय जन्म प्रमाण पत्र ही सही : हाईकोर्ट

3 वर्ष पहले
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हाईकोर्ट ने एक मामले में दसवीं की अंकतालिका में दर्ज जन्मतिथि की बजाय जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज जन्मतिथि को वरीयता देते हुए सही माना है। अदालत ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र एक सरकारी दस्तावेज है जिसे जन्म के तुरंत बाद बनाया जाता है और सरकारी अफसरों द्वारा स्वीकृत किया जाता है। वहीं अदालत ने जिला न्यायाधीश धौलपुर के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसके तहत नगर परिषद के वार्ड नंबर 44 के पार्षद रामकृपाल का चुनाव उसकी दसवीं की अंकतालिका में दर्ज उम्र 21 साल से कम होने के आधार पर उसके निर्वाचन को निरस्त कर दिया था। न्यायाधीश बीएल शर्मा ने यह आदेश रामकृपाल की याचिका पर दिया।

अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में प्रार्थी की जन्मतिथि किस आधार पर दर्ज की गई। ऐसे में उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता। जबकि उसके जन्म के तुरंत बाद उसका जन्म प्रमाण पत्र जारी हुआ है। जिसके चलते उसकी उम्र 21 साल से अधिक है। अधिवक्ता समित विश्नोई ने बताया कि 2015 में वार्ड 44 से पार्षद बना था। इसे पराजित प्रत्याशी धर्मेंद्र सिंह ने यह कहते हुए चुनौती दी थी कि उसकी 10वीं की अंकतालिका में उसकी उम्र 21 साल से कम है। इस चुनाव याचिका पर अधीनस्थ कोर्ट ने गत 20 फरवरी को प्रार्थी को चुनाव के समय दसवीं की अंकतालिका के आधार पर बीस साल दस माह का मानते हुए उसका चुनाव रद्द कर दिया था।

वार्ड पार्षद का चुनाव निरस्त करने वाला अधीनस्थ कोर्ट का आदेश रद्द

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