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बिना तारीख झूठी सुनवाई में मुकदमा खारिज, पता चला तो वापस शुरू किया

3 वर्ष पहले
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सेशन कोर्ट में पौने दो लाख रुपए बकाए का साढ़े नौ साल पुराना मुकदमा तय तारीख से एक महीने पहले सुनवाई पर लगाकर खारिज कर दिया गया। इसके लिए बाकायदा केस की ऑर्डरशीट भी लिखी गई, जिसमें संबंधित वकीलों की हाजिरी दिखाई गई। साथ ही वादी की गैर-हाजरी के आधार पर मुकदमा ही खारिज कर दिया गया। इस निर्णय पर न्यायाधीश की सील के साथ हस्ताक्षर भी हैं। मामला सामने आने पर इसी के आगे एक और आदेश लिखकर मुकदमे को फिर से चालू किया गया।

जयपुर जिले में कोटपूतली स्थित अपर जिला एवं सेशन न्यायालय संख्या एक में मैसर्स बद्रीप्रसाद बनाम बीएसएनएल मुकदमा चल रहा है। सुनवाई के लिए 22 मार्च की तारीख तय थी। परंतु केस की फाइल 22 फरवरी को कोर्ट में पेश हो गई। इस दिन नोटशीट में लिखा गया कि दोनों पक्षों के अधिवक्ता कोर्ट में मौजूद हैं। फर्म के वकील ने “नो इंस्ट्रक्शन प्लीड किया”। वादी खुद उपस्थित नहीं हैं। ऐसे में वादी की अनुपस्थिति और उसकी ओर से पैरवी नहीं होने के कारण केस खारिज किया जाता है। साथ ही पत्रावली को दफ्तर दाखिल करने का आदेश दिया गया।

डीजल के बकाया का है विवाद

कोटपूतली में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर बद्रीप्रसाद एंड संस पंप है। फर्म के अनुसार बीएसएनएल कार्यालय और एक्सचेंज में जनरेटर लगा है। जिसके लिए साल 2004 में लिए गए डीजल और ऑयल के ब्याज सहित 1.81 लाख रुपए बकाया हैं। वहीं बीएसएनएल के अनुसार फर्म से डीजल आपूर्ति का कोई एग्रीमेंट ही नहीं हुआ। संबंधित अधिकारियों ने उधार लिया तो फर्म उनसे वसूल करे।

दूसरे अधिवक्ता ने खारिज कराया मुकदमा!

गड़बड़ी सामने आने पर इसी नोटशीट पर नया आदेश लिखा गया। गड़बड़ी यह हुई कि संबंधित लिपिक ने 22 मार्च की पत्रावली 22 फरवरी में पेश कर दी। नोटशीट में कहा गया कि वकील बजरंगलाल प्रथम ने केस नहीं चलाना जाहिर किया जबकि इस प्रकरण में बजरंगलाल द्वितीय वकील हैं। ऐसे में पिछला आॅर्डर निरस्त करते हुए पत्रावली पूर्व नियत पेशी 22 मार्च को पेश करने के निर्देश दिए गए।

केस की 22 मार्च को तारीख तय थी, मैं सुनवाई के लिए कोर्ट गया था। उस दिन फाइल सुनवाई पर लगी ही नहीं थी। इस पर फाइल निकलवाई। तब सामने आया कि वाद खारिज हो चुका है। - बजरंग लाल शर्मा (द्वितीय), अधिवक्ता, पेट्रोल पंप संचालक

मैं संबंधित मुकदमे में किसी भी पक्षकार का अधिवक्ता नहीं हूं। मुझे कोर्ट का स्टाफ जानता है। ऐसी किसी भी घटना की मुझे जानकारी नहीं है। - बजरंग लाल शर्मा (प्रथम), अधिवक्ता

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