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मीनोपॉज के बाद हर महिला शुरू नहीं करे हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी

4 वर्ष पहले
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हैल्थ रिपोर्टर जयपुर



मीनोपॉज के बाद महिलाओं में हॉर्मोन की कमी होने से डिप्रेशन, मूड खराब रहने सहित कई तरह के बदलाव आना सामान्य है। ये बदलाव दो से तीन साल बाद स्वतः ही ठीक हो जाते हैं, लेकिन महिलाओं में अवेयरनैस नहीं होने की वजह से वे हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की तरफ शिफ्ट हो रही हैं। जबकि इस थेरेपी के साइड इफेक्ट्स भी हैं। लंबे समय तक यह लेने पर कैंसर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। डॉक्टर्स के मुताबिक, यह थेरेपी लेने के बजाय उन्हें हैल्दी डाइट और एक्सरसाइज पर फोकस करना चाहिए। कई केसों में यह थेरेपी भी दी जाती है। ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियां कमजोर) में यह थेरेपी देते हैं।

एचआरटी में फीबोलोन नाम की ड्रग कारगर है। इसके अलावा डिप्रेशन और आइसोफ्लोक्सोन जैसी दवाइयां मीनोपॉजल प्रॉब्लम से रिलीफ देती है। सर्जिकल मीनोपॉज में अचानक से एक साथ हॉर्मोन खत्म होते हैं। इससे महिला में सीवियर लक्षण आते हैं। महिला को परेशानी से बचाने के लिए तीन से छह महीने तक एचआरटी देना जरूरी है। लक्षण के आधार पर यह देखा जाता है कि पेशेंट्स को गोली या फिर जैल से रिलीफ आएगा। दो से तीन साल में ज्यादातर प्रॉब्लम ठीक हो जाती है। सिर्फ पांच परसेंट महिलाओं में ही यह दवाइयां देते हैं। ऑस्टियोपोरोसिस यानी हडि्डयां कमजोर होने में यह थेरेपी देनी पड़ती है। यदि महिला में किसी तरह की साइकोलॉजिकल प्रॉब्ल्म है। वह डिप्रेशन में है। तब भी यह थेरेपी देना कई बार जरूरी हो जाता है। अन्यथा दो से तीन साल में ये प्रॉब्लम्स स्वत: ही ठीक हो जाती है।

किन बीमारियों में नहीं लेनी चाहिए एचआरटी
ब्रेस्ट, ओवरी और यूटरस कैंसर,ब्लड क्लॉट जमना, हाई ब्लड प्रेशर, लिवर की प्रॉब्लम। यह थेरेपी टेबलेट, स्किन पैच,जैल के रूप में दी जाती है। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन की गोलियां सबसे ज्यादा दी जाती हैं। महिलाएं खुद इस थेरेपी में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां नहीं लें। किस महिला को, कौनसी और कितनी मात्रा में दवाइयां दी जाएं। यह डॉक्टर्स को ही तय करना होता है। रिलीफ मिलने पर दवाइयां बंद कर देते हैं। इन दवाइयों से ब्रेस्ट में भारीपन, पेट दर्द, सिर दर्द, जी मिचलाना जैसी प्रॉब्लम हो सकती है। कई सालों तक लेने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा रहता है। स्मोकिंग, अल्कोहल और स्पाइसी फूड से परहेज करें।

-डॉ. नीलम जैन, गाइनीकोलॉजिस्ट, महिला चिकित्सालय, जयपुर

मीनोपॉज दो तरह का होता है
सर्जिकल और नेचुरल। यूटरस और ओवरी निकालना सर्जिकल मीनोपॉज हैं। इसमें अचानक से हॉर्मोन खत्म होने से परेशानी होती है। इसलिए दवाइयां देना जरुरी है। पेशेंट की स्थिति के आधार पर दवाइयां दी जाती है।

लक्षण
हॉट फ्लेशेज, रात को ज्यादा पसीना आना, कमर पर पसीना, मूड खराब रहना, डिप्रेशन, सैक्स में रुचि नहीं रहना, यूरिन बार-बार आना, वैजाइना ड्राई होना।

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