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यमन कल्याण के स्वर गूंजे ताे अाई मधुबाला की याद

3 वर्ष पहले
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City Reporter जयपुर

ज वाहर कला केंद्र में मंगलवार काे उस्ताद सईदुद्दीन डागर की याद में पहला अखिल भारतीय ध्रुवपद अाैर सम्मान समाराेह अायाेजित किया गया। समाराेह में ध्रुवपद के छह गायक अाैर वादकाें ने सुर साधे। उस्ताद नफीसुद्दीन अाैर अनीसुद्दीन डागर, पद्मश्री उस्ताद वासिफुद्दीन डागर अाैर जयपुर की डाॅ. मधु भट्ट तैलंग ने ध्रुवपद गायन तथा दिल्ली के जकी हैदर अाैर मुंबई के उस्ताद बहाउद्दीन डागर ने रुद्र वीणा के स्वर छेड़े। चार घंटे चले इस कार्यक्रम में वरिष्ठ ध्रुवपद गुरु पं. लक्षमण भट्ट तैलंग काे डागर की याद में स्थापित किया गया पहला सर्वज्ञ अवार्ड दिया गया। संस्कृति कर्मी सुधीर माथुर अाैर समाज सेवी राजू मंगाेड़ीवाला ने उन्हें ये सम्मान प्रदान किया। अपने पिता अाैर गुरु काे मिले इस सम्मान काे डाॅ. मधु भट्ट ने गुरु के द्वारा रचित राग जाेग श्री काे गाकर सलीब्रेट किया। राग जाेग श्री राग जाेग अाैर श्री के स्वराें काे मिलाकर बनाया गया है इस वजह से इसमें भक्ति अाैर वैराग्य दाेनाें का मिश्रण पाया जाता है। इस माैके पर दिल्ली के रुद्र वीणा वादक जकी हैदर ने राग यमन कल्याण के सुर सजाए। यमन कल्याण सुनकर सुपर स्टार मधुबाला की याद जेहन में ताजा हाे गई क्याेंकि मधुबाला को राग यमन से बहुत प्यार था, इतना प्यार कि वो खुद को ‘मिस यमन’ कहलाना पसंद करती थीं। 1960 में आई फिल्म ‘बरसात की एक रात’ सुपरहिट हुई थी, उसके म्यूजिक डायरेक्टर रोशन को भी इस फिल्म के संगीत के लिए खूब सराहा गया था। कहते हैं मधुबाला की फरमाइश पर ही उन्हाेंने इस फिल्म के गीत इसी राग पर कंपाेज किए।

जेकेके में अायाेजित ध्रुवपद समाराेह में डागर बंधुअाें, मधु भट्ट, जकी हैदर, बहाउद्दीन अाैर वासिफुद्दीन डागर ने दी प्रस्तुति

शुरुअात हुई सूर मल्हार के सुराें से

इससे पहले समाराेह की शुरुअात उस्ताद नफीसुद्दीन अाैर उस्ताद अनीसुद्दीन डागर ने काफी थाट के राग सूर मल्हार के स्वराें से की। इस राग काे सूरदासी मल्हार भी कहा जाता है। कहते हैं इसकी रचना सूरदास ने की थी। ये राग भी फिल्मी संगीतकाराें का प्रिय राग रहा है। फिल्म चिराग अाशा पारेख पर फिल्माया गया मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा अाैर मदनमाेहन का कंपाेज किया गया नृत्य गीत छाई बरखा बहार भी इसी राग पर अाधारित था।

फिर हुअा गायन अाैर वादन

कार्यक्रम में मुंबई के रुद्रवीणा वादक उस्ताद बहाउद्दीन डागर अाैर दिल्ली के ध्रुवपद गायक पद्मश्री उस्ताद वासिफुद्दीन डागर ने भी प्रस्तुति दी। बहाउद्दीन ने इस माैके पर राग बिहाग के स्वर छेड़े।

- Experienced by Sarvesh Bhatt

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