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जेडीए ने अवैध निर्माण तोड़ने पर खर्च किए Rs.70 लाख, वसूला एक रुपया भी नहीं

3 वर्ष पहले
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अतिक्रमियों पर जेडीए की मेहरबानी सरकारी खजाने पर भारी पड़ रही है। जेडीए ने गोपालपुरा बाईपास, खड्डा बस्ती व निम्स विश्वविद्यालय के सैकड़ों अवैध निर्माण व अतिक्रमण तोड़ने में 70 लाख रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए, लेकिन यहां वसूली एक रुपए की भी नहीं हुई। करीब 22 लाख रुपए तो अकेले निम्स विश्वविद्यालय से वसूला जाना है। निम्स विश्वविद्यालय में हुई तोड़फोड़ को लेकर पिछले तीन महीने से जेडीए केवल एस्टीमेट ही बना रहा है। गोपालपुरा बाईपास व खड्डा बस्ती को लेकर वसूली की प्रक्रिया ही शुरू नहीं हो पाई। हालांकि, कुछ छोटे मामलों में जेडीए ने कागजी खानापूर्ति के लिए अतिक्रमियों से वसूली भी की है, लेकिन यह मशीनरी पर हुए खर्चे से बहुत कम है।

वसूली पर प्रवर्तन व जोन विंग आमने-सामने

जेडीए के मुख्य नियंत्रक (प्रवर्तन) राजेंद्र सिंह सिसोदिया का कहना है कि निम्स विश्वविद्यालय में हुई तोड़फोड़ का खर्चा जोन विंग ही वसूलेंगी। उसके यहां ही प्रक्रिया चल रही है। जोन 13 के डिप्टी कमिश्नर बीसी गंगवाल का कहना है कि एक्सईएन एस्टीमेट बना रहे हंै। अवैध निर्माण को तोड़ने का खर्चा प्रवर्तन विंग व जोन में से एक को करना है। जेडीए रीजन में अवैध निर्माण तोड़ने व अतिक्रमण हटाने का काम प्रवर्तन विंग का है। इंजीनियर व जोन विंग सहयोग करती है। प्रवर्तन विंग के पास दो जेसीबी व मजदूर का जिम्मा है। वहीं लोकंडा सिस्टम से बिल्डिंग व छत को काटा जाता है। वहीं इंजीनियर विंग जेसीबी, डंपर, ब्रेकर मशीन सहित अन्य मशीनरी ठेकेदारों के जरिए लगाते हैं।

जेडीए की आर्थिक हालत खस्ता : जेडीए के बैंक खातों में करीब 40 करोड़ रुपए ही जमा हैं। वहीं भूखंडों की नीलामी में भी सही रेट नहीं मिल पा रही है। इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहा है।

जुर्माना नहीं दे तो संपत्ति से होगी वसूली : जेडीए अधिनियम की धारा 37 व जेडीए एक्टर की धारा 17 (5) के तहत अवैध निर्माण का खर्चा वसूलने का प्रावधान है। अगर अतिक्रमी या मालिक जुर्माना जमा नहीं करवाते है तो मालिकाना संपत्ति से वसूली की जा सकती है।

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