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स्कूल फीस कम क्यों न हो

3 वर्ष पहले
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माधव शर्मा. जयपुर | निजी स्कूलों में मनमानी फीस वसूली के खिलाफ तमिलनाडु में तीन साल की सजा का प्रावधान है, जबकि राजस्थान में जुर्माने की व्यवस्था है वो भी अन्य राज्यों से कम। राजस्थान में पहली बार नियम विरुद्ध फीस बढ़ाए जाने की शिकायत सही पाए जाने पर 50 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है जबकि महाराष्ट्र में 2 से 10 लाख रुपए तक जुर्माना किया जा सकता है। राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में राजस्थान विद्यालय (फीस का विनियमन) कानून बनाया था। कानून की धारा 9 (2) के तहत फीस विनियामक कमेटी किसी भी स्कूल के रिकॉर्ड की जांच कर सकेगी। कानून की धारा 15 (क) के तहत पहली बार फीस ज्यादा वसूलने की शिकायत पाए जाने पर 50 हजार, दूसरी बार शिकायत सही मिलने पर एक लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। काबिलेगौर है कि जयपुर में इस सत्र में निजी स्कूलों ने 10 से 48 फीसदी तक फीस बढ़ोतरी की है।

तमिलनाडु

तमिलनाडु सरकार ने 2009 में यह कानून बनाया था। इसके तहत हाईकोर्ट के पूर्व जज के नेतृत्व में कमेटी बनाई गई है जो हर साल फीस निर्धारण करती है। नियमों का पालन नहीं करने पर कम से कम 3 साल की सजा जो 7 साल भी की जा सकती है और 5000 रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, राजस्थान में भी इसी आधार पर 2013 में कानून बनाया गया था लेकिन उसे वापस लेकर 2016 में महाराष्ट्र पैटर्न पर नया कानून बनाया गया है।

आंध्रप्रदेश

आंध्र प्रदेश ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी के खिलाफ 2009 में एक्ट पारित किया। इसके तहत एप्लीकेशन फीस 100 रुपए और रजिस्ट्रेशन फीस 500 रुपए से ज्यादा नहीं होगी। वन टाइम फीस के नाम पर कोई वसूली नहीं होगी। ट्यूशन फीस स्टाफ को दी जाने वाली सैलरी के आधार पर ली जाएगी और कम से कम 3 किश्तों में ली जाएगी। फीस के लिए स्कूलों को अलग-अलग बैंक अकाउंट खोलने होंगे। किताबों के लिए शहर में कम से कम 3 दुकानें होंगी और बच्चों को स्कूल से ही कोई सामान खरीदने पर बाध्य नहीं किया जाएगा। आंध्र प्रदेश में इसकी सख्ती से पालना हो रही है।

महाराष्ट्र

2011 में बने फीस एक्ट में यदि स्कूल पहली बार नियमों को तोड़ते हैं तो कम से कम 1 लाख रुपए जुर्माना जो बढ़ाकर 5 लाख या बढ़ाई गई फीस का दोगुना होगी। दूसरी बार गलती पर 2 लाख और अधिकतम 10 लाख रुपए जुर्माना। बार-बार नियम तोड़ा तो प्रिंसिपल की नौकरी लेंगे

उत्तर प्रदेश

निजी स्कूल 7-8% से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। सत्र शुरू होने से 60 दिन पहले स्कूलों को वेबसाइट पर फीस दिखानी पड़ेगी। 5 साल से पहले यूनिफॉर्म नहीं बदल सकेंगे। नियम तोड़ा तो 1 से 5 लाख जुर्माना। तक का जुर्माना। फिर भी न माने तो मान्यता रद्द।

मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश में निजी स्कूल एक साल में 10% से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकते। पहली बार नियम तोड़ने पर 2 लाख रुपए जुर्माना, दूसरी बार पर 4 लाख और तीसरी बार नियम तोड़ने पर मान्यता रद्द की जाती है।

दूसरे राज्य हमसे ज्यादा सख्त

फीस एक्ट के उल्लंघन पर 3 साल जेल

सैलरी के आधार पर ट्यूशन फीस

10 लाख जुर्माना और प्रिंसिपल को नौकरी से हटाने का प्रावधान

बार-बार फीस बढ़ाई तो स्कूल की मान्यता खत्म

चार लाख जुर्माना और मान्यता खत्म किए जाने का प्रावधान

गुजरात

2017 में बने फीस रेग्यूलेशन एक्ट के तहत ज्यादा फीस वसूली तो स्कूल पर 5 लाख रुपए जुर्माना। दूसरी बार में 10 लाख और तीसरी बार में स्कूल की मान्यता रद्द। 15 दिन तक जुर्माना नहीं भरा तो जुर्माना 1% बढ़ेगा। 3 माह में भी नहीं भरा तो जमीन छीन लेंगे।

3 माह तक जुर्माना ना भरा तो जमीन छीनेंगे

तमिलनाडु में फीस बढ़ाने पर तीन साल की सजा का प्रावधान...

फीस चैक से, किताब-ड्रेस का पैसा नकद क्यों?

कॉपी-किताब और ड्रेस के लिए अभिभावक हर बार चुकाते हैं Rs.250 करोड़ नकद

केंद्र और राज्य सरकार डिजिटलाइजेशन के चाहे जितने दावे करें लेकिन शहर के अधिकांश निजी स्कूलों में कॉपी-किताब और ड्रेस का पैसा नकद ही लिया जा रहा है। अधिकांश स्कूलों ने जिन बुक स्टॉल को काॅपी-किताब के लिए अधिकृत किया है वो डिजिटल पेमेंट लेने से इंकार कर रहे हैं। अभिभावक परेशान हो रहे हैं।

अभिभावक घबराएं नहीं, फीस वृद्धि पर अपनी बात रखें : शिक्षामंत्री

शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने अभिभावकों से कहा है- अभिभावक चिंता न करें, घबराएं नहीं। ज्यादा फीस वृद्धि पर अपनी बात फीस कमेटी के सामने और कमेटी स्कूल में प्रभावी ढंग से रखें। नए नियम सभी निजी विद्यालयों (कक्षा एक से 12, कक्षा एक से 8 व कक्षा एक से 5) चाहे वह किसी भी शिक्षा बोर्ड या मंडल से संबद्ध हों, उन पर प्रभावी होंगे। इनकी पालना नहीं करने पर विद्यालय की मान्यता समाप्त करने की कार्यवाही की जाएगी।

स्कूलों को चेतावनी : राज्य और सीबीएससी संबद्धता वाली कोई भी स्कूल मनमाने ढंग से विद्यालयों में फीस वृद्धि करते हैं तो नियमानुसार कड़ी से कड़ी कार्यवाही होगी। निजी स्कूल मनमाने तरीके से फीस वृद्धि नहीं कर सकते। अभिभावकों पर दुकान विशेष से पुस्तकें एवं अन्य सामग्री क्रय का दबाव भी नहीं डाल सकते हैं। निजी विद्यालय की यूनिफार्म न्यूनतम 5 वर्षों तक बदली नहीं जाएगी।

सरकार और विपक्ष के अपने तर्क

हर सत्र में अभिभावकों को कोर्स-यूनिफार्म पर 250 करोड़ रुपए नकद चुकाने पड़ते हैं।

शहर में 4500 निजी स्कूल हैं जिनमें करीब पांच लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। सभी में स्कूल बस-ऑटो भी कैश में ही पैसा लेते हैं।

प्रत्येक विद्यार्थी को कोर्स के लिए औसतन 4 हजार रुपए और स्कूल ड्रेस के लिए दो हजार रुपए तक नकद भुगतान करना पड़ रहा है।

सरकार ने फीस नहीं घटाई तो सीएम हाउस का घेराव करेंगे : खाचरियावास

कांग्रेस ने फीस वृद्धि के विरोध में बुधवार को शहर में 16 स्थानों पर शिक्षामंत्री के 32 पुतले जलाए। इस दौरान बड़ी संख्या में अभिभावक भी मौजूद रहे। कलेक्ट्रेट सर्किल बनीपार्क और एनबीसी तिराहे पर प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए। शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतापसिंह खाचरियावास ने चेतावनी दी- सरकार ने यही स्कूलों द्वारा बढ़ाई फीस तुरंत कम ना कराई तो कांग्रेस सीएम हाउस का घेराव करेगी।

खाचरियावास ने कहा है- सरकार बड़े निजी स्कूलों के साथ मिलकर बड़े भ्रष्टाचार को अंजाम दे रही है। स्कूल मनमाने तरीके से बहुत ज्यादा फीस वृद्धि कर चुके हैं। पेट्रोल-डीजल और खाद्य सामग्री बहुत ज्यादा महंगी होने से पहले ही आम आदमी का बजट बिगड़ा हुआ है। सरकार की ओर से कहीं कोई नियंत्रण नहीं किया जा रहा। कांग्रेस का आंदोलन लगातार जारी रहेगा।

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