8 करोड़ के गेहूं घोटाले में आईएएस निर्मला मीणा ने किया सरेंडर
सरेंडर करते समय निर्मला मीणा ने पूरा चेहरा ढंका हुआ था। पूछताछ शुरू करने से पहले अफसरों ने पर्दा हटाने को कहा-लेकिन मना कर दिया। सवालों के जवाब भी नहीं दिए। थोड़ी सख्ती की गई तो मीणा ने दुपट्टा भी हटाया और कालाबाजारी भी कबूल कर ली।
जोधपुर | आठ करोड़ रु. के गेहूं घोटाला मामले में आखिर सीनियर आईएएस अफसर निर्मला मीणा ने बुधवार दोपहर एसीबी ऑफिस में सरेंडर कर दिया। मीणा ने खुद को बचाने के लिए कई जतन किए, लेकिन कोई काम नहीं आया। 17 अप्रैल को हाईकोर्ट और 10 मई को सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उनके सामने सरेंडर का ही एकमात्र रास्ता बचा। उनके पति पवन मित्तल भी घिरते नजर आ रहे हैं। दोनों के खिलाफ 12 मई को एसीबी ने आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज किया है। शेष | पेज 8
बुधवार दोपहर निर्मला मीणा अपने वकील के साथ सरेंडर करने पहुंची। मीणा को गुरुवार सुबह कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा।
निर्मला मीणा व पवन मित्तल के नाम से मिली करोड़ों की प्रोपर्टी के कुछ कागजात एसीबी ने रजिस्ट्री ऑफिसों से निकाले हैं। इनमें असली कागजात कहां है, वह मित्तल काे पता है। तीन बैंकों के लॉकर भी अब तक नहीं खुल पाए, क्योंकि पति-प|ी दोनों अंडरग्राउंड थे। मित्तल से काली-कमाई का पूरा हिसाब लिया जाएगा।
यह था मामला
मार्च 2016 में निर्मला मीणा ने जयपुर रसद विभाग को तीन लाइन की चिट्ठी लिखी कि जोधपुर शहर में 33 हजार परिवार बढ़ गए हैं इसलिए 35 हजार क्विंटल अतिरिक्त गेहूं दिया जाए। यह गेहूं 7 लाख परिवारों में बंट सकता था, मगर उसे आटा मिलों को बेच दिया गया। हकीकत में इतने बीपीएल परिवार बढ़े ही नहीं थे। शुद्धिकरण में 33 हजार राशन कार्ड ही फर्जी निकले थे, इसलिए यह संख्या कम कर दी गई थी। परंतु मीणा ने चार्ज लेते ही इन्हीं लोगों का फिर से गेहूं आवंटित करवा कर बेच दिया।
29 में से 24 साल की नौकरी जोधपुर में की
निर्मला मीणा अपनी 29 साल की नौकरी में से 24 साल तो जोधपुर में ही रही हैं। वे छह बार जोधपुर की डीएसओ रहीं। मीणा इस केस में नहीं फंसती तो शायद इसी जिले की बड़ी अधिकारी होती, जो इतने लंबे समय तक एक जिले में रही। लेकिन अब वे जोधपुर सेंट्रल जेल में आने वाली पहली आईएएस अधिकारी बन सकती हैं।