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स्वर्णनगरी में हर महीने 20 लाख यूनिट बिजली चोरी, डिस्कॉम को सालाना 12 करोड़ का नुकसान

3 वर्ष पहले
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राज्य सरकार द्वारा महंगी दरों पर बिजली की खरीद कर आमजन को सब्सिडी देने के साथ आपूर्ति की जाती है। लेकिन उसके उपरांत भी बिजली की चोरी थमने का नाम ही नहीं ले रही है। गौरतलब है कि सरकार द्वारा लगभग 7 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली की खरीद की जाती है तथा आमजन को सब्सिडी देने के बाद यहीं 4 से 5 रुपए प्रति यूनिट से बिल दिया जाता है। उसके बाद भी बिजली की चोरी लगातार बढ़ रही है। लेकिन डिस्कॉम के पास अभी बिजली चोरी को रोकने के कोई पुख्ता प्रबंध नहीं है। यहां तक की डिस्कॉम को यह भी जानकारी नहीं है कि यह बिजली कहां खर्च हो रही है।

ऐसा नहीं है। थोड़ी बहुत छीजत हो रही है। पिछले साल जो छीजत 22 प्रतिशत थी इस साल वहीं छीजत 16 प्रतिशत तक आ गई है। इसके साथ ही शहरी छीजत भी 12 प्रतिशत ही है। उसके बाद भी जो छीजत है उसे कम करने का प्रयास किया जा रहा है। सीएस मीना, अधीक्षण अभियंता, डिस्कॉम

बिजली की छीजत 22 %से घटकर 16 % हुई

लगातार बढ़ रही है चोरी | अगर डिस्कॉम के आंकड़ों पर ही बात की जाए तो बिजली की चोरी हर साल बढ़ ही रही है। लगातार बढ़ रही बिजली की चोरी के आगे डिस्कॉम भी बेबस नजर आ रहा है। बेबसी का अंदाजा तो इसी बात से लगाय जा सकता है कि डिस्कॉम के पास यह भी सूचना नहीं है कि किस क्षेत्र में बिजली की चोरी हो रही है।

किस क्षेत्र में कितनी चोरी जानकारी ही नहीं | डिस्कॉम द्वारा बिजली चोरी का पता लगाने के लिए शहर के हर ट्रांसफार्मर पर ऑटोमेटिक रीडिंग मीटर भी लगाए गए। लेकिन उसका अभी तक उपयोग शुरु नहीं किए जाने के कारण डिस्कॉम किस क्षेत्र में कितनी चोरी हो रही है यह बताने की भी स्थिति में भी नहीं है।

एएमआर मीटर का नहीं हो रहा है उपयोग

डिस्कॉम द्वारा बिजली की चोरी का पता लगाने के लिए शहर के ट्रांसफार्मरों पर एएमआर मीटर लगाए गए, लेकिन उसकी केबल व कंट्रोल रूम स्थापित नहीं करवाने के कारण वह मीटर भी कोई उपयोग में नहीं आ रहे है। डिस्कॉम द्वारा एक निजी कंपनी से 4.47 लाख रुपए का एमओयू करके मीटर तो लगवा दिए गए। लेकिन केबल व कंट्रोल रूम स्थापित नहीं किए जाने के कारण मीटर सिर्फ दिखावा ही साबित हो रहे है।

क्या है स्थिति

जैसलमेर शहर में अप्रैल महीने में करीब 85 लाख यूनिट सप्लाई दी गई। जिस पर उपभोक्ताओं के बिल बनने पर 65 लाख 78 हजार यूनिट का खर्च का रिकॉर्ड सामने आया। अब इन आंकड़ों पर अगर नजर दौड़ाई जाए तो सिर्फ अप्रेल महीने में 20 लाख यूनिट कहां खर्च हुए इसकी किसी को कोई भी जानकारी नहीं है। इस हिसाब से डिस्कॉम को हर महीने 20 लाख यूनिट के पैसे नहीं मिल रहे है। इसके अनुसार 5 रुपए प्रति यूनिट की दर से डिस्कॉम को हर महीने करीब 1 करोड़ रुपए की चपत लग रही है।

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