जैसलमेर | स्थानीय खेजड़ पाड़ा स्थित चांडक भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक संत भरत भाई ने कहा कि जब पृथ्वी पर अधासुर, बकासुर, वृषभासुर दैत्य हुए व कंस शिशुपाल, कौरव अत्याचारी राजा हुए उन सबके पाप के भार से पीड़ित पृथ्वी ब्रह्मा जी के पास गई तब ब्रह्माजी शंकर भगवान को साथ लेकर धरती माता का दुख सुनाने क्षीर सागर गए। वहां भगवान नारायण ने दुष्टों का नाश करने के लिए अवतार लेने का आश्वासन दिया। भरत भाई ने भगवान कृष्ण के प्राकट्य का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान का अवतार लेने का विशेष कारण तो इस धरती पर अवतीर्ण होकर अपनी दिव्य लीलाओं को प्रकाशित करना है ताकि श्रद्धालु उन दिव्य मधुर लीलाओं का गान करते हुए आनंदित हो एवं अंत में मोक्ष प्राप्ति करे।