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शहर के तालाबों को अब भी संरक्षण की दरकार

3 वर्ष पहले
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कुछ समय पूर्व तक आमजन व पशुधन की प्यास बुझाने का कार्य करने वाले पारंपरिक जलस्रोत तालाब अब उपयोग नहीं होने के कारण दुर्दशा पर आंसू बहा रहे है। पूर्व में जब तालाब प्यास बुझाने का काम करते थे तब तक आमजन द्वारा ही इनका रखरखाव व संरक्षण किया जाता था। उसके उपरांत हर घर में सीधे पानी की सप्लाई की सुविधा होने से कोई भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। आमजन के साथ प्रशासन द्वारा भी शहरी तालाबों के संरक्षण के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किए जा रहे है। इससे दिन ब दिन इन तालाबों की स्थिति खराब हो रही है। हालांकि प्रशासन सरकार के मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना के तहत ग्रामीण अंचलों के तालाब व नाड़ियों के संरक्षण का प्रयास तो कर रहे है। लेकिन शहर के पुराने जलस्रोत अभी भी अपने संरक्षण व रखरखाव का इंतजार कर रहे हैं। इन तालाबों के संरक्षण के लिए सिर्फ प्रशासन का जागरूक होना ही पर्याप्त नहीं है। प्रशासन के साथ आमजन भी जागरूक होकर इन तालाबों के रखरखाव में अपना समय व श्रम दे, जिससे समय रहते इनका सही संरक्षण किया जा सके। शहर के तालाबों के संरक्षण के लिए कई संस्थाओं को भी आगे आकर इसमें सहयोग देना चाहिए। विभिन्न एनजीओं के शहर के तालाब के संरक्षण में आगे आने की स्थिति में आमजन भी इसके प्रति जागरूक होंगे। तालाबों के संरक्षण के वृहद स्तर पर प्रयास किए जाए ताकि इतिहास के पन्नों के साथ इन तालाबों को वर्तमान में भी जीवंत रखा जा सके।

यह है स्थिति

गड़ीसर तालाब | कभी पूरे शहर की प्यास बुझाने की क्षमता वाला गड़ीसर तालाब भी अब दिन ब दिन सीमित होता जा रहा है। स्वर्णनगरी के मुख्य पर्यटन स्थलों में शुमार गड़ीसर तालाब दिनों दिन अपना स्वरूप खो रहा है। वृहद पानी को अपने आप में इकट्ठा रखने की क्षमता वाला गड़ीसर अब पर्यटकों के लिए आकर्षण के केंद्र के रुप में स्थापित हो गया है। लेकिन प्रशासन द्वारा भी इसके संरक्षण के लिए कोई खास प्रबंध नहीं करने के कारण गड़ीसर तालाब में पानी का स्तर लगातार कम हो रहा है।

मलका तालाब | गफूर भट्टा में मलका प्रोल के पास स्थित मलका तालाब अभी अपना मूल स्वरूप भी खो चुका है। पूर्व में पानी से लबालब रहने वाला मलका तालाब बरसात के कुछ समय बाद ही सूख जाता है। पूर्व में इस इलाके की प्यास बुझाने वाला तालाब आज खुद ही सूखा है।

सरकार द्वारा ग्रामीण अंचलों के तालाब व नाड़ियों का संरक्षण किया जा रहा है लेकिन शहर के तालाबों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अगर शहर के तालाबों का सही संरक्षण किया जाए तो इन्हीं तालाबों से 2 साल तक शहर में पेयजल आपूर्ति की जा सकती है। महेश व्यास (गोगा महाराज), अध्यक्ष, स्वर्णनगरी विचार मंच

गुलाब सागर | जोधपुर रोड़ पर रेलवे स्टेशन के सामने की तरफ स्थित गुलाब सागर का अस्तित्व ही अब खतरे में है। तालाब के अंदर ही पेड़ पौधे उग आए है। गुलाब सागर में पानी आने वाले रास्ते में बब्बर मगरा, आईजीएनपी कॉलोनी, इंद्रा कॉलोनी के बस जाने से पानी की आवक एक दम बंद हो गई है। जिससे इस तालाब में सिर्फ बरसात के पानी आने के कारण इस तालाब की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जिससे इस तालाब के अंदर व आगोर में जबरदस्त झाड़ियां भी उग आई है।

जीवणियाई तालाब | गफूर भट्टा में ही स्थित जीवणियाई तालाब भी रखरखाव के अभाव व अतिक्रमण के चलते खराब हो रहा है। एक समय पानी से लबरेज रहने वाला तालाब अब बरसात के पानी में भी पूरा नहीं भर पाता है। अतिक्रमण के कारण तालाब में बरसाती पानी की आवक ही नहीं होती जिससे तालाब बरसात के बाद भी लगभग सूखा रहता है।

अतिक्रमण से करवाएं मुक्त

पूर्व में सभी तालाब बरसात के पानी से लबालब हो जाते थे। लेकिन अब शहर के सभी तालाबों पर अतिक्रमियों ने कब्जे कर रखे है, जिससे बरसाती पानी इन तालाबों में नहीं आता है। इन्हें अतिक्रमियों से मुक्त करवाकर संरक्षण करवा सकते हंै।

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