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अधिकमास में श्रीमद‌्भागवत की कथा से बड़ा दूसरा कोई सद‌्कर्म नहीं : व्यास

3 वर्ष पहले
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किशन घाट स्थित मोहनगर महाराज मंदिर प्रांगण में बुधवार को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ शोभा यात्रा के साथ हुआ। शोभा यात्रा गजरुप सागर रोड स्थित श्री सांईधाम मंदिर से मुख्य गांव किशन घाट से होती हुई कथा स्थल पहुंची। पहले दिन की कथा प्रारंभ करते हुए कथा वाचक शैलेंद्र व्यास ने कथा का माहात्मय सुनाते हुए भागवत शब्द का अर्थ बताया एवं समझाया कि केवल श्रीमद्भागवत से जीव को भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, त्याग भावना की प्राप्ति होती है। जो भागवत का आश्रय ग्रहण करता है वह जीव, व्यक्ति, ज्ञान व वैराग्य से पूर्ण हो जाता है। व्यास ने आगे बताया कि संसार में मुक्ति का एक ही श्रेष्ठ उपाय है सत्कर्म आैर श्रीमद्भागवत की कथा से बड़ा दूसरा कोई सत्कर्म नहीं है। साक्षात ब्रह्मा ने ब्रह्म लेख में सभी साधनों की तुलना श्रीमद्भागवत से की लेकिन संसार के अन्य सभी साधन भागवत से हल्के ही निकले उसके बाद ब्रह्मा ने यह घोषणा कर दी कि आज के बाद जीव की मुक्ति का श्रेष्ठतम साधन केवल श्रीमद्भागवत कथा ही है। माहात्मय की कथा सुनाते हुए बताया कि कथा श्रवण करने से जीव का देहलोक और परलोक दोनों ही सुधर जाते हैं। श्रीमद् भागवत की कथा जीवन में जीव की दिशा बदल देती है एवं मृत्यु के पश्चात उसकी दशा बदल देती है। गौकर्ण उपाख्यान सुनाते हुए बताया कि धुंधुकारी ब्रहम होते हुए भी पथ भ्रष्ट हुआ जिसके कारण उसे मृत्यु के पश्चात प्रेत बनना पड़ा परंतु गौकर्ण जैसे ज्ञानी भाई द्वारा इस प्रेत की मुक्ति के लिए संकल्प से कथा का आयोजन किया गया। उसका परिणाम यह हुआ की वह धुंधुकारी प्रेत योनि से मुक्त हो गया। जीव की अपनी दिशा व दशा सुधारने का श्रेष्ठतम मार्ग श्रीमद् भागवत कथा ही है एवं इसका निरंतर श्रवण करते रहना चाहिए। कथा के दौरान राजेंद्र व्यास द्वारा सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी गई। कथा का आयोजन सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक किया जा रहा है।

जैसलमेर. श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ पर पूजन करते हुए।

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