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सुंदर स्वरूप लेकर आता है पाप, लेकिन उसका स्वभाव सुंदर नहीं होता : व्यास

3 वर्ष पहले
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बबर मगरा स्थित मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन की कथा सुनाते हुए शैलेंद्र व्यास ने भगवान के प्रागटिय पर गोकुल में मनाए गए नंद उत्सव का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि गोकुल कोई स्थान विशेष का नाम नहीं है गोकुल तो जीव मात्र का शरीर ही है। जब इस गोकुल रुपी शरीर में भगवान का आगमन हो जाता है तो जीव के जीवन में आनंद ही आनंद आ जाता है जीव तब तक ही दुखी रहता है जब तक उसे परमात्मा के स्वरूप का दर्शन न हो जाए और जब वह हो जाता है तो सभी कष्ट स्वत ही समाप्त हो जाते है। भगवान के प्रगट होते ही समस्त गोकुलवासियों के कष्ट मानो समाप्त ही हो गए हो सभी नंद जसोदा को बधाई देने आते जा रहे है और उपहार प्राप्त करते जा रहे है। व्यास ने बताया कि जीवन में जब पाप या अविद्या आती है तो सुंदर स्वरूप लेकर आती है लेकिन स्वभाव उसका सुंदर नहीं होता उससे दृष्टि मिलाना भी नहीं चाहिए। पूतना उद्धार की कथा को सुनाते हुए बताया कि पूतना तो पाप का ही रुप है लेकिन सुंदर ग्वालन बनकर आई लेकिन भगवान ने उसको देखते ही नेत्र बंद कर दिए और लीला करते हुए उसका उद्धार कर दिया, जिन्हें भगवान का स्पर्श या सानिध्य प्राप्त हो उसके सारे पाप जलकर भष्म हो ही जाते है। भगवान की बाल लीलाओं का गान करते हुए भगवान के नामकरण की कथा को सुनाया और कहा कि भगवान कभी श्वेत कभी रक्त वर्ण में प्रगट होते है लेकिन इस समय कृष्ण वर्ण में प्रगट होने के कारण उनका नाम कृष्ण हुआ माखन चोरी की कथा को सुनाते हुए बताया कि भगवान ने गोपियों के माखन को चुराना तो सिर्फ लीला है वास्तव में तो उन्होंने ब्रजवासियों के माखन स्वरूप मन को चुराया है भगवान को वही जीव प्रिय है जिनका चिंतन माखन के जैसा उज्ज्वल हो और जीव का ह्नदय भी माखन से समान कोमल हो जिनके ह्नदय में करुणा्रऔर प्रेम हो। गोवर्धन लीला कथा सुनाते हुए बताया कि आत्मारुपी भगवान जब तक इस गोवर्धन रुपी शरीर को उठाए है तब तक सब कुछ ठीक है और जैसे ही भगवान इस गोवर्धन रुपी शरीर का त्याग करते है वैसे ही यह शरीर मृत हो जाता है। जब तक भगवान इसे उठाए बैठे है हम सभी को सुरक्षा व आनंद लेना चाहिए। हमारे पास केवल सात दिन ही है जीवन में और यदि कोई जीव इंद्र के समान अभिमान करता है तो भगवान उसका सर्वस्व हरण कर बता देते है कि देख तू खाली हो गया है तेरा किया कुछ नहीं चलता यहां तो वही होता है जो ईश्वर भगवान श्रीकृष्ण चाहते है इस प्रकार उन्होंने गोवर्धन लीला का आध्यात्मिक स्वरूप समझाया गया। कथा के दौरान भजन गायक राजेंद्र व्यास द्वारा सुंदर भजन प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया गया।

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