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दो हजार पशु खेळियां और 500 जीएलआर जिले के 32 लाख पशुओं के लिए पानी नहीं

3 वर्ष पहले
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हमें अगर प्यास लगती है तो हम किसी को कह सकते हैं, पानी के लिए जिम्मेदारों के यहां दस्तक दे सकते हैं और कई बार धरना प्रदर्शन करके पानी की व्यवस्था कर लेते हैं। लेकिन इन मूक पशुओं का दर्द शायद कोई नहीं समझ रहा है। दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर ये मूक पशु प्यास के मारे मर रहे हैं।

नाचना से लेकर सम तक नहरी क्षेत्र, करीब 2500 किमी नहरों व माइनरों का जाल बिछा हुआ है। फिर भी पानी का संकट समझ से परे है। एक अनुमान के मुताबिक जिले की करीब 2 हजार पशु खेळियां व 500 जीएलआर सूखी पड़ी है। इन दिनों पानी के अभाव में ये मूक पशु कई किमी तक भटक रहे हैं और उन्हें पानी नसीब नहीं हो रहा है। कई पशु खेळियों पर दर्जनों पशु मंडराते नजर आ रहे हैं, कई जगह प्यास से तड़पते पशु तो कई जगह पानी की कमी से काल का ग्रास बने पशु दिखाई पड़ रहे हैं।

मूक पशुओं का दर्द बयां करता ये फोटो : शायद जिम्मेदारों की आंखें खोल दंे

पशु शिविर खोलने की मांग

पशु शिविर खोलने की मांग

फतेहगढ़ (आंचलिक) | रामा सरपंच मोहनदान ने बुधवार को कलेक्टर को ज्ञापन दिया है। ज्ञापन में बताया कि अकाल के चलते पशुओं को खाने के लिए चारा नहीं मिल रहा है जिसके कारण ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में पशु शिविर खोलने की मांग की गई।

फतेहगढ़ (आंचलिक) | रामा सरपंच मोहनदान ने बुधवार को कलेक्टर को ज्ञापन दिया है। ज्ञापन में बताया कि अकाल के चलते पशुओं को खाने के लिए चारा नहीं मिल रहा है जिसके कारण ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में पशु शिविर खोलने की मांग की गई।

हर गांव में तीन-चार पशु खेळियां, सभी सूखी

हर गांव में तीन से चार पशु खेळियां है जिसमें से अधिकांश सूखी पड़ी हैं।

जीएलआर 8 से 10 दिन में एक बार भरी जाती है, कई गांवों की जीएलआर पाइप लाइन से भी नहीं जुड़ी है।

नहरों में पानी की आवक लेकिन आमजन व पशुओं तक पानी नहीं पहुंच रहा है।

पाइप लाइनों के लीकेज से रोजाना हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है लेकिन मूक पशुओं तक नहीं पहुंच रहा है।

जिम्मेदार व जनप्रतिनिधि इसे लेकर कतई गंभीर नहीं।

पिछले एक माह में 5 हजार पशु पानी की कमी के चलते काल कलवित हो चुके हैं।

जिले में पशुओं की आबादी करीब 32 लाख है। पेयजल संकट के दौरान जलदाय विभाग के नियम है कि प्रति व्यक्ति 100 लीटर प्रति दिन पानी की व्यवस्था करना। हालांकि ये जिम्मेदार इतना भी नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन नोर्मस के अनुसार उनका प्रयास 100 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन का ही रहता है। ऐसे में पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना उनके नोर्मस में नहीं है। जो कुछ भी है वह 100 लीटर में ही है। जैसलमेर में 32 लाख पशु हैं उन्हें पानी नहीं मिल रहा है लेकिन वे उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं।

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