जैसलमेर | किशनघान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन की कथा सुनाते हुए कथा वक्ता शैलेंद्र व्यास ने भगवान के प्रागटिय पर गोकुल में मनाए गए नंद उत्सव का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि गोकुल कोई स्थान विशेष का नाम नहींं है। गोकुल तो जीव मात्र का शरीर ही है। जब इस गोकुल रूपी शरीर में भगवान का आगमन हो जाता है तो जीव के जीवन में आनंद ही आनंद आ जाता है। जीव तब तक ही दुखी रहता है जब तक उसे परमात्मा के स्वरूप का दर्शन न हो जाए और जब वह हो जाता है तो सभी कष्ट स्वतः ही समाप्त हो जाते है। व्यास ने बताया कि जीवन में जब पाप या अविद्या आती है तो सुंदर स्वरूप लेकर आती है परंतु स्वभाव उसका सुंदर नहीं होता उससे दृष्टि मिलाना भी नही चाहिए। भगवान की बाल लीलाओं का गान करते हुए भगवान के नामकरण की कथा को सुनाया और कहा की भगवान कभी स्वेत कभी रक्त वर्ण में प्रगट होते है परंतु इस समय कृष्ण वर्ण में प्रगट होने के कारण उनका नाम कृष्ण हुआ। माखन चोरी की कथा को सुनाते हुए बताया कि भगवान ने गोपियों के माखन को चुराना तो सिर्फ लीला है। वास्तव में तो उन्होंने बृजवासियों के माखन स्वरूप मन को चुराया है क्योंकि भगवान को वही जीव प्रिय है जिनका चिंतन माखन के जैसा उज्ज्वल हो और जीव का ह्नदय भी माखन से समान कोमल हो, जिनके ह्नदय में करूणा और प्रेम हो।