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205 इंटरनेशनल मैच खेले, 9 महीने बैन लगा तो हाईकोर्ट से हटवाया

3 वर्ष पहले
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2006 में दोहा एशियन गेम्स में भारतीय टीम की तरफ से डेब्यू करने वाले गुरबाज सिंह को 2015 में हॉकी इंडिया ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर टीम से निकाल दिया। हॉकी इंडिया ने गुरबाज सिंह को इस बारे कुछ नहीं बताया और सीधा मीडिया रिपोर्ट में उन्हें पता चला कि अनुशासनहीनता के चलते उन्हें बाहर किया गया है। इसकी शिकायत उन्होंने हॉकी इंडिया के एडजेक्टिव बोर्ड से की, लेकिन बोर्ड ने 9 महीने का बैन लगा कर डोमेस्टिक टूर्नामेंट खेलने पर भी पाबंदी लगा दी।

हिम्मत न हारते हुए गुरबाज ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने हॉकी इंडिया की तरफ से लगाए 9 महीने के बैन को इल्लीगल करार दिया तो 2016 में साउथ एशियन गेम्स से गुरबाज ने टीम में वापसी की। गुरबाज ने बताया कि फेडरेशन में पॉलिटिक्स हमेशा से हावी रही है, जिसके चलते अकसर टीम को कई बार प्रभावित होती है। गुरबाज ने कहा कि अगर इंडिया की तरफ से दोबारा उन्हें खेलने का मौका मिला तो वह जरूर खेलेंगे।

2011 में पंजाब टीम के कैप्टन थे: पंजाब की तरफ से 2011 नेशनल चैंपियनशिप में पंजाब टीम के कैप्टन थे, टीम ने गोल्ड जीता, 2012 बैंगलोर नेशनल में गोल्ड, 2016 लखनऊ नेशनल में पंजाब टीम के कैप्टन टीम ने सिल्वर मेडल जीता, 2017 लखनऊ नेशनल में पंजाब टीम के कैप्टन टीम ने ब्रांज मेडल जीता, 2018 में भी टीम के कैप्टन टीम ने गोल्ड मेडल जीता।

सुरजीत हॉकी टूर्नामेंट में जीत हासिल की : ऑल इंडिया पुलिस गेम्स 2012-13 में गोल्ड मेडल, 2018 ऑल इंडिया पुलिस गेम्स सोनीपत में गोल्ड मेडल टीम के कैप्टन, 2017 में सुरजीत हॉकी टूर्नामेंट में पंजाब पुलिस की टीम ने 17 साल बाद जीत हासिल की। इस टीम के भी वे कैप्टन रहे। 2018-चंडीगढ़ एयर मार्शल अर्जन सिंह हॉकी टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल और टीम के कैप्टन रहे।

2016 में साउथ एशियन गेम्स से गुरबाज ने की वापसी, बोले- फेडरेशन में पॉलिटिक्स हमेशा से हावी रही

हॉकी की शुरुआत... डिस्ट्रिक फिरोजपुर तहसील जीरा के गांव मलसियां कलां के गुरबाज सिंह ने हॉकी की शुरुआत घर से की। बड़े भाई कुलदीप सिंह व चाचा चरणजीत सिंह हॉकी खेलते थे, उन्हीं की तरफ देख कर हॉकी खेलने का शौक हुआ और शहजादा संत सिंह मलसियां कलां स्कूल में चौथी क्लास से ही हॉकी खेलनी शुरू की। शहर की सुरजीत हॉकी स्टेडियम में अंडर-14 के ट्रायल देकर लायलपुर खालसा स्कूल नकोदर चौक में 7 और 8वीं की पढ़ाई की। इसके बाद रमेश चंद्र एकेडमी में कोच जगदीप गिल से प्रेक्टिस शुरू कर सेंट सोल्जर स्कूल में 9वीं से 10वीं तक पढ़ाई के साथ-साथ हॉकी में राइट हाफ की बारीकियां सीखीं।

साल 2003 में अंडर-21 जूनियर टीम में सिलेक्शन हुई

साल 2003 में गुरबाज ने पहली बार बांग्लादेश में हुए अंडर-16 जूनियर चैंपियनशिप में टीम इंडिया की तरफ से पार्टिसिपेट करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। इसी साल अंडर-21 में जूनियर इंडिया टीम में सिलेक्शन हुई और पोलैंड में हुए 6 नेशन टूर्नामेंट में टीम इंडिया की तरफ से गोल्ड मेडल हासिल किया और साल 2006 में सीनियर नेशनल टीम में दोहा एशियन गेम्स में डेब्यू किया। इसके बाद 2007 चेन्नई सीनियर एशिया कप में गोल्ड, 2008 हैदराबाद जूनियर एशिया कप में बतौर कैप्टन गोल्ड मेडल, 2009 व 2010 सुलतान अजलान शाह हॉकी टूर्नामेंट मलेशिया में गोल्ड मेडल, 2010 दिल्ली वर्ल्ड कप में मैन ऑफ द डिफेंडर चुने गए, 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल, 2010 चाइना एशियन गेम्स में ब्रांज मेडल, 2011 चाइना एशियन चैंपियनशिप ट्राफी में गोल्ड और 2010 में ऑल एशियन स्टार प्लेयर के रूप में सिलेक्ट हुए। 2014 हॉलैंड वर्ल्ड कप में पार्टिसिपेशन, 2014 ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल, 2014 चाइना एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल, 2015 भुवनेश्वर चैंपियन ट्राफी में पार्टिसिपेशन, 2016 गुवहाटी साउथ एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल। 2006 से 20015 तक गुरबाज ने भारत की तरफ से 205 इंटरनेशनल मैच खेले। अब पंजाब व पंजाब पुलिस की तरफ से खेल रहे हैं।

अवॉर्ड : पंजाब सरकार की तरफ से 2013 में महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड दिया गया। 2015-16 में अर्जुन अवॉर्ड के लिए अप्लाई किया था लेकिन मिला नहीं। इसके बाद अप्लाई नहीं किया।

गुरबाज सिंह

फैमिली : पिता अजीत सिंह, किसान, मां कश्मीर कौर हाउस वाइफ। बड़ा भाई कुलदीप सिंह किसान, नछत्तर सिंह किसान, दो भतीजे कंवलप्रीत व रमनप्रीत हैं। बहन जतिंदर कौर मैरिड हैं।

2012 लंदन ओलंपिक : 2012 लंदन ओलंपिक में गुरबाज भारतीय टीम का हिस्सा रहे, टीम का काफी खराब प्रदर्शन रहा था। गुरबाज ने बताया कि टीम पूरी तरह से यंग प्लेयर की चुनी गई थी। तजुर्बेकार खिलाड़ियों की कमी के चलते टीम कुछ खास नहीं कर पाई। भारत और विदेशों में यह फर्क भी है कि हमारे यहां यंग खिलाड़ियों को सिलेक्टर कर पूरी यंग टीम बनाई जाती है जबकि विदेशों की टीमें में यंग खिलाड़ियों के साथ तजुर्बेकार खिलाड़ी भी टीम में शामिल रहते है, जिससे बैलेंस बना रहता है। भारत में जब प्लेयर को खेलने का एक्सपीरियंस आता है उसे बाहर कर दिया जाता है।

एयर इंडिया से पंजाब पुलिस में डीएसपी : गुरबाज 2003 से 2006 तक इंडियन एयर लाइन में स्कॉलरशिप पर खेलते रहे हैं। 2006 में एयर इंडिया की तरफ से अमृतसर में सुपरवाइजर की नौकरी पर जॉइन किया, 2010 में असिस्टेंट मैनेजर बने। साल 2011 में गुरबाज ने पंजाब पुलिस में बतौर डीएसपी जॉइन किया। 2013 में पुलिस ट्रेनिंग में एसएलआर और थ्री नॉट थ्री में बेस्ट शूटर रहे और पटियाला में कमांडों ट्रेनिंग की। अब गुरबाज पंजाब पुलिस व पंजाब की तरफ से हॉकी खेल रहे हैं।

हॉकी इंडिया लीग में सबसे महंगे खिलाड़ी गुरबाज : हॉकी इंडिया लीग 2017 नीलामी में गुरबाज सिंह सबसे महंगे खिलाड़ी रहे। गुरबाज को रांची रेज ने 99,000 डॉलर (67.3 लाख रुपए) की बोली लगाकर अपनी टीम में शामिल किया था। इससे पहले लीग में 2013 से 2015 तक दिल्ली वेव राइडर की तरफ से खेले। टीम की तरफ से 2013 में सिल्वर, 2014 में गोल्ड, 2015 में ब्रांज जीता।

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