1986 ढाका एशियन गेम्स में पाकिस्तान के साथ मैच में हुए विवाद के बाद ओलंपियन रजिंदर सिंह समेत भारत के कुल 6 खिलाड़ियों पर बैन लगा दिया गया। रजिंदर सिंह ने बताया- मैच में भारत के गोल को अंपायर ने रिजेक्ट कर दिया और पाकिस्तानी खिलाड़ी ने कंधे से ऊपर हॉकी उठाकर टेनिस शॉट के रूप में गोल किया गया था।
उस समय कंधे से हॉकी ऊपर ले जाने पर फाउल माना जाता था, अंपायर ने गोल करार दिया था। उसके बाद शुरू हुए विवाद में रजिंदर सिंह सहित हरदीप, मरविन फर्नांडिस, रोमियो जेम्स, सुमाया, टिकन सिंह को बैन कर दिया गया। विवाद के बाद वर्ल्ड हॉकी फेडरेशन की मीटिंग हुई, लेकिन भारत की तरफ से कोई नुमाइंदा मीटिंग में नहीं पहुंचा। वर्ल्ड हॉकी फेडरेशन ने दूसरी मीटिंग में 4 खिलाड़ियों से बैन हटाकर रजिंदर व रोमियो जेम्स पर बैन रहने दिया।
रजिंदर सिंह ने बताया कि उस बैन के पीछे पंजाब हॉकी फेडरेशन व इंडिया हॉकी फेडरेशन ने पॉलिटिक्स की थी, उन्होंने पंजाब फेडरेशन को माफी पत्र भेजा था पर उन्होंने इंडियन फेडरेशन को पत्र नहीं भेजा। महज 25 साल की उम्र में रजिंदर सिंह को बैन किया था। रजिंदर सिंह ने कहा कि अगर उन पर बैन न लगता तो वे 1992 ओलंपिक तक भारत की तरफ से खेलते। 1981 से 1986 तक ही भारत की तरफ से खेल सके।
1981 से 1986 तक पांच साल के करियर में भारत के लिए करीब 70 इंटरनेशनल मैच खेले
2011 में भारत सरकार ने द्रोणाचार्य अवार्ड देकर किया सम्मानित
रजिंदर सिंह प|ी मनजीत कौर के साथ।
इंडिया टीम : 1981 में सीनियर टीम में सिलेक्शन
कंबाइंड यूनिवर्सिटी के बाद 1981 में रजिंदर सिंह की सीनियर इंडिया टीम में रशिया टेस्ट के साथ सीरीज के लिए सिलेक्शन हुई। भारत में खेली गई इस टेस्ट सीरीज में भारत ने जीत हासिल की थी। 1981 मुंबई वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया में स्टैंडबॉय खिलाड़ी रहे, 1982 दिल्ली एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल, 1983 ऑस्ट्रेलिया वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल, 1983 मलेशिया में अजलान शाह टूर्नामेंट में ब्रांज मेडल, 1983 में मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड के साथ टैस्ट सीरीज, 1983 में वर्ल्ड लेवल टीम में भारतीय खिलाड़ियों में रजिंदर सिंह व मोहम्मद शाह को चुना गया था। 1984 जर्मनी में फोर नेशन टूर्नामेंट सिल्वर मेडल, 1984 कराची चैंपियन ट्राफी, 1984 दुबई में पाकिस्तान के साथ टेस्ट सीरीज, 1985 ढाका एशियन कप में सिल्वर मेडल, 1986 दुबई में पाकिस्तान के साथ टैस्ट मैच खेले। वेटरन वर्ल्ड कप साल 2000 में टीम के कप्तान रहे और टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर जीत हासिल की थी।
रजिंदर सिंह
जसकरण सिंह।
हॉकी की शुरुआत : 8वीं में स्कूल की जूनियर टीम में सेंटर फारवर्ड बने
नकोदर के सरींह गांव में हॉकी खेलनी शुरू की। 1973-74 में गांव के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 8वीं में स्कूल की जूनियर टीम में सेंटर फारवर्ड खिलाड़ी के रूप में सिलेक्ट हुए। 10वीं तक इसी स्कूल से सीनियर टीम की तरफ से इंटर-डिस्ट्रिक व डिस्ट्रिक चैंपियनशिप खेली। केआरएम डीएवी कॉलेज में 11वीं की पढ़ाई के साथ इंटर कॉलेज टूर्नामेंट खेले। इसी कॉलेज से ग्रेजुएशन की और तीसरे साल 1979 में पीएयू लुधियाना नॉर्थ जोन में जीएनडीयू की तरफ से गोल्ड, ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में गोल्ड। दो बार कंबाइंड यूनिवर्सिटी की तरफ से खेले। स्कूल में पंडित केवल कृष्ण और कॉलेज में हरपाल सिंह मठारू कोच थे।
ध्यानचंद अवॉर्ड दिया गया
2011 में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल से द्रोणाचार्य अवॉर्ड, 2005 में स्वर्गीय राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से ध्यानचंद अवॉर्ड, 1984 में महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड मिला।
जॉब... 1981 इंडियन रेलवे की तरफ से जालंधर में टीटी की पहली पोस्ट पर जॉइन किया और 9 महीने बाद पंजाब पुलिस में हेड कांस्टेबल जॉइन किया। एशियन गेम्स में विवाद के बाद 1987 में पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर पद से रिजाइन करने के बाद पंजाब एंड सिंध बैंक में ऑफिसर जॉइन किया और अब बैंक में चीफ मैनेजर की पोस्ट पर है।
1984 में अमेरिका ओलंपिक टूर्नामेंट में 5वां स्थान...1984 अमेरिका ओलंपिक टूर्नामेंट में टीम को पांचवां स्थान मिला। टीम गोल एवरेज के साथ टूर्नामेंट से बाहर हुई थी। भारतीय टीम ने स्पेन को हराया, मलेशिया को हराया, यूएसए को हराया था जबकि जर्मनी के साथ ड्रा और ऑस्ट्रेलिया से 3-2 से हार के कारण गोल एवरेज पर बाहर हो गए थे। 1984 ओलंपिक की टीम सबसे बेहतरीन थी क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के पूर्व खिलाड़ी और टीम इंडिया के कोच रहे रिक चार्ल्स ने कहा था कि टूर्नामेंट में हमारी मुख्य फाइट भारतीय टीम से है और ओलंपिक में भारत की अब तक की बेहतरीन टीम है।
पंजाब की तरफ से 1982 से 1987 तक नेशनल टूर्नामेंट खेले...ओलंपियन सुरजीत हॉकी टूर्नामेंट 14 बार, रमेश चंद्र हॉकी टूर्नामेंट 7 बार, इंदिरा गांधी गोल्ड कप 6 बार जीते। इसी तरह नेहरू हॉकी टूर्नामेंट 5 बार, महाराजा रणजीत सिंह टूर्नामेंट 2 बार, गुफराने आजम हॉकी टूर्नामेंट 2 बार, चैंपियंस ट्राफी 1 बार, गुरमीत हॉकी टूर्नामेंट चंडीगढ़ 6 बार, लाल बहादुर शास्त्री 3 बार, वेटरन कप कलकत्ता 4 बार जीते। पंजाब एंड सिंध बैंक में कोच व खिलाड़ी के रूप में मुंबई गोल्ड कप 2 बार, मेरठ मोदी टूर्नामेंट 2 बार, मद्रास एमसीसी टूर्नामेंट 2 बार जीते। पंजाब की तरफ से 1982 से 1987 तक नेशनल टूर्नामेंट खेले, जिसमें 1 गोल्ड, 1 सिल्वर, तीन ब्रांज मेडल शामिल हैं। रजिंदर सिंह 10 पोजीशन पर फर्स्ट क्लास हॉकी और नेशनल लेवल पर खेल चुके है।
फैमिली : बेटा जसकरण भी हॉकी खिलाड़ी
पिता स्वर्गीय प्रीतम सिंह, मां नरिंदर कौर हाउस वाइफ। बड़े भाई अमरीक सिंह एक्सईएन रिटायर्ड, गुरमिंदर सिंह इंग्लैंड है। बहन गुरबख्श कौर, दर्शन कौर नार्वे व बलजिंदर कौर इंग्लैंड में सेटल हैं।
प|ी : मनजीत कौर हाउस वाइफ
बेटी : मनिंदर कौर मैरिड कनाडा में सेटल हैं।
छोटी बेटी : संदीप कौर कनाडा में स्टडी कर रही हैं।
बेटा : जसकरण सिंह भी हॉकी खिलाड़ी हैं। वे 3 बार कंबाइंड यूनिवर्सिटी, एक बार नेशनल पंजाब की तरफ से और 3 बार 3 बार पंजाब एंड सिंध बैंक की तरफ से खेल चुका है। इस साल सीनियर नेहरू हॉकी टूर्नामेंट व ऑल इंडिया गुरमीत हॉकी टूर्नामेंट चंडीगढ़ में बेस्ट खिलाड़ी रहे। अब पंजाब एंड सिंध बैंक में हैं।
जब हॉकी खेलनी आई, तब बैन किया
रजिंदर सिंह ने कहा कि 1981 से 1986 तक उन्होंने पांच साल के करियर में भारत के लिए करीब 70 इंटरनेशनल मैच खेले। उन्हें गलत बैन किया गया है। अगर बाकी चार खिलाड़ियों से बैन हटाया जा सकता है तो मुझ पर और रोमियो पर लगा बैन भी हटाया जा सकता था। अगर फेडरेशन अपनी पॉलिटिक्स न करती तो 1996 तक भारत के लिए हॉकी में बहुत कुछ करना था। लेकिन फिर भी मलाल नहीं है क्योंकि जो हॉकी में नहीं कर पाया, उसे कोचिंग में कर दिखाया। 2004 में सीनियर इंडिया वुमन टीम के कोच, 2005-06 में सीनियर इंडिया मैन्स टीम के कोच, अब पंजाब एंड सिंध बैंक में टीम व एकेडमी के चीफ कोच है। नेशनल स्तर के अंपायर है, 1999 से 2001 तक जूनियर इंडियन वुमैन टीम के सिलेक्टर, 2001 में एनआईएस पटियाला में हॉकी डिप्लोमा में टॉप किया। 45 के करीब ऐसे हॉकी खिलाड़ी है, जो रजिंदर सिंह से कोचिंग लेकर भारत को ओलंपिक सहित वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स व इंटर नेशनल स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके चलते उन्हें द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया। एफआईएच की तरफ से हाई परफारमेंस कोचिंग कोर्स भी कर चुके हैं।