आर्य समाज मंदिर शहीद भगत सिंह नगर में साप्ताहिक यज्ञ हुआ। मुख्य यजमान डंकेश्वर मित्तू, प्रवीण मित्तू थे। सोनू भारती ने बरसा बरसा दाता सुख बरसा...भजन गाया। आचार्य शिवा शास्त्री ने कहा कि मानव किसी न किसी तरीके से इस पवित्र प्रकृति को प्रदूषित करता है। यदि मानव इसे हवन के माध्यम से शुद्ध कर सकता है और यही हमारे ऋषि मुनियों ने एक सुंदर वैज्ञानिक प्रक्रिया दी है।
जिसे महर्षि स्वामी दयानंद ने हमारे बीच में यज्ञ के माध्यम से रखा है। मानव रोज हवन नहीं कर सकता है तो कम से कम सप्ताह में एक बार हवन से आने वाले समय के लिए शुद्ध वातावरण दे सकता है। ऐसी जिम्मेदारी आज के प्रत्येक मनुष्य की है और अपने बच्चों को हम किसी न किसी प्रकार से यज्ञ से जोड़ कर उन्हें वैदिक संस्कारों से जोड़ना ही उद्देश्य है।
ये रहे मौजूद : यहां प्रधान रणजीत आर्य, ईश्वर चंद्र, ओम प्रकाश, पूनम मेहता, स्वर्ण शर्मा, सतपाल मल्होत्रा, भूपेंद्र उपाध्याय, सुरेंद्र अरोड़ा, चौधरी हरिश्चंद्र, बैजनाथ, विजय चावला, सुभाष आर्य, इंदु आर्या, दिव्या आर्या, वंश आर्य, सुदर्शन आर्य, ओम मल्होत्रा, सृष्टि आर्य, विजय सेठी, मोहनलाल, राजीव शर्मा, संदीप अरोड़ा, नलिनी उपाध्याय, उर्मिला भगत, मनु आर्य, सुनीत भाटिया, सुभाष मेहता, मदनलाल, विजय शेट्टी, रामनिरंजन, श्रुति शर्मा, रानी अरोड़ा, स्नेह लता, ललित मोहन, सुदर्शन आर्य, दीपिका अरोड़ा, सुदेश भगत, शादी लाल, उर्मिला शर्मा, अमित सिंह, पवन शुक्ला, उमा शुक्ला, संगीता तिवारी, सोनिया, स्वर्ण कोर, अनिल मिश्रा, प्रिया मिश्रा, निखिल लखन आदि थे।
आचार्य शिवा शास्त्री ने कहा, अपने बच्चों को किसी न किसी प्रकार वैदिक संस्कारों से जोड़ना ही उद्देश्य।
जैसे कर्म करेंगे वैसा ही उसका फल जीवन में सुख और दुख के रूप में मिलेगा
जालंधर |आर्य समाज मंदिर माडल टाउन में पं. सत्य प्रकाश शास्त्री और पं. बुद्धदेव वेदालंकार ने यज्ञ करवाया। यजमान आनंद प्रकाश चावला थे। सुरिंदर सिंह गुलशन ने अगर पाप में आपकी मन नहीं तो ईश्वर का मिलना भी मुश्किल नहीं है...भजन गाया। पं. सुशील शर्मा ने कहा कि इस मानव जीवन को यूं ही न व्यर्थ गवाएं। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति के लिए ही यह जन्म मिला है। जो जैसा कर्म करता है उसे वैसा ही फल मिलता है। इसलिए जीवन में आने वाले दुखों को देख कर घबराएं नहीं। सत्य कर्मों के मार्ग पर चलते रहें और खुद ब खुद दुखों के बादल छंट जाएंगे। संचालन जोगिंदर भंडारी न किया। यहां रमेश चंद्र चोपड़ा, जगदीश शर्मा, दमयंती सेठी, उमा तनेजा, प्रोमिला अरोड़ा, राज किरण अरोड़ा, सुशील खरबंदा, सुशीला बत्तरा, विजय चोपड़ा, सुदेश, संतोष खन्ना आदि थे।