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जीवन में भोजन की तरह जरूरी ईश्वर भक्ति

3 वर्ष पहले
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स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि परमात्मा का स्वरूप अनंत है। -भास्कर

सिटी रिपोर्टर| जालंधर

गीता मंदिर अर्बन इस्टेट फेस-1 में आयोजित पंजाब प्रांतीय विशेषाधिवेशन के दूसरे दिन स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि परमात्मा का स्वरूप अनंत है।

उन्हें मनुष्य किसी भी स्वरूप में कल्पना कर ध्यान की विधि से उनकी प्राप्ति कर सकता है। क्यों कि ध्यान ही ऐसी विधि है जो हमें उस परमात्मा से मिला सकता है, तत्पश्चात संतमत सत्संग के वर्तमान आचार्य महर्षि हरिनंदन परमहंस महाराज का पदार्पण हुआ है।

उन्होंने के जीवन मे जैसे जीवन जीने के लिए भोजन जरूरी है ठीक उसी तरह जीवन मे ईश्वर भक्ति जरूरी है। सत्संग बिना सोचो मानव- जग में वह ज्ञान कहा होगा। जीवन में सत्संग के बिना कहीं भी वो ज्ञान नहीं मिल सकता। सत्संग में आना उतना ही जरूरी है जितना कि जीवन श्वास लेना, उस ईश्वर का दर्शन पाना है तो गुरु के दिए नाम शब्द का ध्यान योग द्वारा सुमिरन कर उस परमात्मा की प्राप्ति कर सकते है। लेकिन उसके लिए विधि जानना बहुत जरूरी है, सत्संग ही है जो तुरंत मिलाता है सच्चे सदगुरु से, जीवन में सच्चे सदगुरु का होना बहुत जरूरी है। क्यों कि ईश्वर तक जाने का रास्ता सच्चे सदगुरु ही बताते है।

ये रहे मौजूद : यहां एस के मेहता, प्रो. चंद्र शेखर प्रसाद, सुरेश कुमार, राजेंद्र मेहता, विपिन यादव, वीरेंद्र यादव, अशोक यादव, संजीव यादव, प्रेस सचिव दीपक सैनी, आकाश कुमार और रविंदर कुमार आदि थे।

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