भार्गव कैंप के राजकुमार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसपर नशा तस्करी का इसलिए केस दर्ज किया क्योंकि पुलिस के कहने पर शराब का धंधा नहीं शुरू किया था। वहीं आरोप के घेरे में आए एएसआई जगतार सिंह ने कहा कि नशे का केस बिल्कुल सही है। आरोपी पुलिस पर दबाव बनाने के लिए ऐसा आरोप लगा रहा है।
राजकुमार ने कहा कि वह 6 अप्रैल को दोपहर एक बजे थाना-5 के पास स्थित दुकान पर स्कूटर पर कपड़े लेने गया था, तभी थाना-5 के मुलाजिम आए और बोले- मारपीट के केस में थाने लेकर जाना है। जब उसने केस में कोर्ट से जमानत मिलने की बात कही तो वे गुस्से में आ गए। उसकी तलाशी लेनी शुरू कर दी और बच्चों की फीस के रखे 10 हजार रुपए निकाल लिए। उसके स्कूटर की चाबी छीन ली तो डरकर वहां से भाग गया।
‘हाईकोर्ट में शिकायत की तो, मिलीं धमकियां’
राजकुमार ने आरोप लगाया कि 7 अप्रैल को थाना-5 से एएसआई जगतार सिंह ने घर आकर परिवार को धमकाया और बताया कि उसका स्कूटर श्मशानघाट के पास लावारिस हालत में मिला है। जिसके फुटरेस्ट के नीचे एक ग्राम स्मैक बरामद हुई है। एएसआई ने यह भी कहा- तूं अपना बंदा है, इसलिए सिर्फ एक ग्राम स्मैक का केस डाला है। राजकुमार ने कहा- इस बारे में पुलिस कमिश्नर को दरख्वास्त भी दे चुके हैं। जब हाईकोर्ट में पुलिस मुलाजिमों की शिकायत की तो तीनों मुलाजिमों समेत एएसआई जगतार सिंह ने उसे धमकाना शुरू कर दिया कि शिकायत वापस नहीं ली तो एक किलो नशीला पाउडर डालकर जेल भेज देंगे।
अवैध कारोबार करता था तो महीना देता था
राजकुमार ने कहा कि वह एक साल पहले शराब की सप्लाई करता। जब शराब की सप्लाई करता था तो पुलिस को 30 हजार रुपए हर महीना देता था। उसपर शराब बेचने के केस भी दर्ज हैं। एक साल पहले उसनेे काम और पुलिस को महीना देना बंद कर दिया। इसी कारण पुलिस उसे फंसा रही है।
हमें गश्त करते हुए मिला था स्कूटर: एएसआई
एएसअाई जगतार सिंह ने कहा कि 9 अप्रैल को वे पुलिस पार्टी के साथ गश्त कर रहे थे कि थाना-5 में पड़ते श्मशानघाट के पास लावारिस स्कूटर मिला था। उसमें एक ग्राम स्मैक बरामद हुई थी। पुलिस ने किसी पर कोई जाली केस नहीं किया। उधर, एसीपी वेस्ट बलविंदर सिंह ने कहा कि मामला उनके ध्यान में नहीं है। वह किसी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।