भौतिक विज्ञान से बहुत विशाल है प्रभु कृपा विज्ञान
‘बिना मंत्रों के कोई भी औषधि पूर्ण रूप से काम नहीं करती। आयुर्वेदाचार्यों को औषधि तोड़ने और उसे प्रदान करने के समय विशेष मंत्रों का पाठ करना चाहिए। ऐसे करने पर ही औषधि प्रभावी होती है।’ यह प्रवचन ब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी ने बर्ल्टन पार्क में ‘प्रभु कृपा दुख निवारण समागम’ में पहले दिन कहे। स्वामी जी ने कहा कि एक समय था, जब अमेरिका और इंग्लैंड के बुद्धिजीवी वेदों, सनातन संस्कृति और पूजा-पाठ से दूर भागते थे। इन लोगों को लगता था कि यज्ञ, पूजा-पाठ, मंत्रा इत्यादि पाखंड हैं लेकिन आज वहीं लोग सबसे अधिक पूजा-पाठ कर रहे हैं। बुद्धिजीवियों के प्रामाणिक और तथागत अनुभवों के आधार पर हम निष्कर्ष पर पहुंच चुके हैं कि प्रभु कृपा विज्ञान उनके भौतिक विज्ञान से बहुत विशाल है।
मंत्रों का पाठ करने से ही औषधी प्रभावी होती है
बर्ल्टन पार्क में ‘प्रभु कृपा दुख निवारण समागम’ का पहला दिन
प्रवचन करते हुए ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी ने कहा संत का सच्चा सम्मान लाखों करोड़ों भाई-बहनों का प्रेम होता है। -भास्कर
वेद-शास्त्रों का अनुसरण ही दुखों से मुक्त होने का जरिया: भाई गुरदास
स्वामी जी ने कहा कि आज विश्व की सरकारें और संसदें उन्हें जो सम्मान प्रदान कर रही हैं, वह सम्मान व्यक्तिगत न होकर सभी धर्म शास्त्रों का सम्मान है। संत का सच्चा सम्मान लाखों-करोड़ों भाई-बहनों का प्रेम होता है। यह गौरव की बात है कि भारतीय संस्कृति और सनातन पुरातन मर्यादा को पूरे विश्व में मान्यता मिल रही है। भगवान श्री लक्ष्मी नारायण धाम के महासचिव गुरुदास ने कहा कि स्वामी जी वैदिक शास्त्रों और सनातन संस्कृति के गौरव को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचा रहे हैं। आज विश्व की सरकारें और नागरिक वेद-शास्त्रों का अनुसरण कर अपने दुखों से मुक्त हो रहे हैं। बुद्धिजीवी और वैज्ञानिक जगत के लोग साक्ष्यों के साथ इस तथ्य को स्वीकार कर रहे हैं कि प्रभु कृपा की सीमाएं अनंत हैं। गुरुदास जी ने कहा कि समागम के दूसरे दिन सभी रोगों को पैदा करने वाले फंगल इंफेक्शन को जड़ से समाप्त करने का अद्भुत प्रयोग किया जाएगा।