मेहरचंद पॉलिटेक्निक कॉलेज के फार्मेसी विभाग के स्टूडेंट्स ने दिल की नाड़ियों में ब्लॉकेज से होने वाली बीमारियों के लिए ‘कोरोनरी आरट्री डिसिज: थ्रोमबस एस्पिरेशन’ का वर्किंग मॉडल बनाया है। मीना बांसल और करणइंदर सिंह की देखरेख में बने मॉडल का उद्देश्य नाड़ियों में ब्लाकेज से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक करना था। विभागाध्यक्ष डॉ. संजय बांसल ने बताया कि बढ़ती उम्र व गलत खानपान से नाड़ियों में फैट जमा होने से हृदय में खून का संचार कम होने व ऑक्सीजन की कमी से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है और पेशंट को स्टंट डलवाने की या फिर बायपास सर्जरी करवाने की सलाह दी जाती है। स्टूडेंटस हनी, बलविंदर, जसकीरत और साहिल ने नई टेक्निक थ्रोमबस एस्पिरेशन का मॉडल बनाकर बताया कि कैसे नाड़ियों में जमा फैट को बाहर खींच लिया जाता है और दोबारा ब्लाकेज का खतरा कम हो जाता है।
प्रिंसिपल डॉ. जगरूप सिंह और विभागाध्यक्ष डॉ. संजय बांसल ने स्टूडेंट्स को बधाई दी।।