प्रशासन ने जिले के 129 इल्लीगल ट्रेवल एजेंट्स की लिस्ट पुलिस डिपार्टमेंट को कार्रवाई के लिए भेजी है। इन्होंने इमीग्रेशन कारोबार का लाइसेंस लेने के लिए प्रशासन के पास अप्लाई किया था लेकिन लाइसेंस के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट्स सब्मिट नहीं करवाए थे। कार्रवाई सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के आदेश पर की गई है।
पीड़ित को आरोपी की संपत्ति बेचकर मुआवजा दिलाएगी कोर्ट
सरकार ने 2012 में पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ह्यूमन स्मगलिंग एक्ट पास किया था, जिसका बाद में नाम बदलकर पंजाब ट्रेवल प्रोफेशनल रेगुलेशन एक्ट कर दिया गया। अब कोर्ट में दोष साबित होने पर आरोपी को सजा के अलावा पीड़ित को मुआवजा दिलाने का भी प्रावधान है। अदालत पीड़ित को आरोपी की संपत्ति जब्त करके मुआवजा भी दिला सकती है। उधर, बगैर लाइसेंस काम करने वाले ट्रेवल एजेंट के खिलाफ एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज होगी। इसमें 7 साल तक की सजा और 5 लाख रुपये तक पेनल्टी का प्रावधान है।
आईलेट्स सेंटर नहीं कर सकेंगे वीजा से संबंधित काम...जिला प्रशासन से ट्रेवल एजेंसी का लाइसेंस लेने वाले लोग वही काम कर सकेंगे, जिसका उन्होंने लाइसेंस लिया है। आईलेट्स सेंटर का लाइसेंस लेने वाले वीजा से संबंधित कोई काम नहीं कर सकेंगे। अगर किसी ने स्टूडेंट या टूरिस्ट वीजा बिजनेस का लाइसेंस लिया है तो वह कोई दूसरा काम नहीं कर सकता। इसी तरह अगर टिकटिंग का लाइसेंस है तो वह सिर्फ टिकटें ही बुक कर सकता है।
एसडीएम के पास भी कर सकेंगे शिकायत...ट्रेवल एजेंट्स से परेशान कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत अब पुलिस के अलावा सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के पास भी कर सकता है। एसडीएम की रिपोर्ट के बाद पुलिस केस दर्ज करके कार्रवाई शुरू करेगी। कंपलेंट का 2 महीने में निपटारा करना होगा। इस बारे एडीसी जसबीर सिंह का कहना है कि इमीग्रेशन कारोबार एक्ट के मुताबिक ही चलेगा। सरकार के निर्देश मुताबिक बगैर लाइसेंस जितने भी इमीग्रेशन दफ्तर चल रहे हैं, उन्हें बंद किया जाएगा।