सिविल अस्पताल में नवजात बच्चों के लिए वेंटिलेटर आए एक महीना हो गया है पर अभी तक इंस्टालेशन नहीं हो पाई। सिविल अस्पताल में रोजाना प्रीमेच्योर और बीमार बच्चों को प्राइवेट अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। प्राइवेट अस्पतालों में एक दिन में वेंटिलेटर का खर्च लगभग 7 हजार रुपए तक आ जाता है। सिविल में आने वाले ज्यादातर लोग जरूरतमंद परिवारों से आते हैं।
ऐसे में प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए उन्हें कर्ज भी उठाना पड़ जाता है। इस पर सेहत विभाग ध्यान नहीं दे रहा। अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. केएस बावा ने बताया कि वेंटिलेटर का एक पुर्जा अभी तक हमें नहीं मिला है। मिलने के बाद इसे इंस्टाल किया जाएगा। यह पुर्जा कंपनी ने सप्लाई करना है। इसके बाद कंट्रोलर ऑफ स्टोर्स की टीम अस्पताल आकर वेंटिलेटर का मुआयना करेगी और इसकी इंस्टालेशन की मंजूरी देगी। हमने पंजाब हेल्थ सिस्टम कार्पोरेशन को जल्द से जल्द इंस्टालेशन के लिए कहा है।
रोजाना प्रीमेच्योर और बीमार बच्चों को प्राइवेट अस्पतालों में किया जा रहा रेफर
सिविल में सीरिंजें नहीं, सारी टीकाकरण टीमों में बांट दीं, रात को जाना पड़ रहा प्राइवेट अस्पताल
जालंधर| सिविल अस्पताल से रुई और सीरिंजें खत्म हुए 20 दिन से ज्यादा समय हो गया है। अस्पताल में फ्री में मिलने वाले इस सामान के लिए मरीजों को जेब से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
जानकारों के मुताबिक एक मई से शुरू हुए मीजल रूबेला (खसरा) टीकाकरण अभियान में सिविल अस्पताल का सारा सामान टीका लगाने वाली टीमों में बांट दिया था। सिविल सर्जन दफ्तर की तैयारी अधूरी थी। कायदे से उन्हें सीरिंजें सेहत विभाग के वेरका स्थित गोदाम से सामान मंगवाना चाहिए था।
सिविल अस्पताल में हालात यह हैं कि रात में किसी मरीज को टीका लगाना पड़ जाए तो सीरिंज खरीदने के लिए प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ रहा है क्योंकि बाहर सभी दुकानें बंद हो चुकी होती हैं।