पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Punjab
  • Jalandhar
  • नकारात्मक सोच... बैसाखी के दूसरे ही दिन जला दी पराली

नकारात्मक सोच... बैसाखी के दूसरे ही दिन जला दी पराली

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बैसाखी के दूसरे दिन जैसे ही अलीपुर गांव में गेहूं के खेतों में कटाई शुरू हुई तो खेतों में बची पराली को आग भी लगा दी गई। दैनिक भास्कर को रीडर अनिल सोनी ने ये तस्वीर भेजी है। खेतों में आग लगाने से मेन रोड पर धुआं भर गया और लोगों को सांस लेने में दिक्कत आई। ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ। कंबाइन से कटाई के बाद खेतों में कुछ इंच लंबी जड़ों के रूप में पराली बची होती है। इसे ट्रैक्टर से उखाड़ने पर लगने वाले डीजल के खर्च को बचाने के लिए तेल डालकर पराली को आग लगा दी जाती है। यह सोचे-समझे बगैर इससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान का खमियाजा हमें ही उठाना पड़ेगा।

बंजर हो सकती जमीन... अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने पंजाब और हरियाणा के खेतों में लगाई आग की स्पेस से खींची तस्वीरें जारी की थीं। आग किसानों और खेतों के लिए भी खतरनाक है। खेती विशेषज्ञों के मुताबिक खेतों में आग लगने से खेत की मिट्टी में मौजूद खनिज नष्ट हो जाते हैं और जमीन पर बंजर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। पराली को जलाने से जो नुकसान होता है उसकी भरपाई कई साल तक नहीं हो पाती है। किसानों जागरूक होने की जरूरत है।

नाम की सख्ती... पाॅल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने धान के सीजन में पराली जलाने वालों पर सख्ती की थी। 450 किसानों के चालान कटे। सख्ती केवल धान के ही सीजन तक सीमित है। अब नई योजना ये है कि किसानों के बच्चों को पाॅल्यूशन कंट्रोल बोर्ड पराली जलने से होने वाले वातावरण के नुकसान को लेकर जागरूक करेगा। इन दिनों योजना पर काम चल रहा है।

खबरें और भी हैं...