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इमरजेंसी में टॉर्च की लाइट में अटेंड करने पड़े मरीज

3 वर्ष पहले
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जब भी बिजली का कट लगता है तो सिविल अस्पताल में मशीनें बंद हो जाती हैं। डॉक्टरों को टॉर्च से मरीजों का चैकअप करना पड़ता है। रविवार को टीवी सेंटर स्थित सब स्टेशन का ट्रांसफार्मर जल गया। रात 7.30 से 11 बजे तक निजात्म नगर, ज्योति चौक से सटे इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। सबसे ज्यादा असर सिविल अस्पताल पर पड़ा।

जनरेटर चलाने वाला इलेक्ट्रिशियन दिन में तो उपलब्ध रहता है लेकिन रात को उसे घर से बुलाना पड़ता है। रविवार को डॉक्टर मोबाइल के टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज करते नजर आए। अगर आप्रेशन के बीच लाइट चली जाए या गंभीर मरीज वेंटिलेटर पर पड़ा हो तो डॉक्टरों पर मुसीबत तो पड़ती ही है, किसी की जान जोखिम में पड़ जाती है।

मिसमैनेजमेंट

2 साल से हॉटलाइन से कटा है सिविल अस्पताल, रविवार शाम 7:30 से 11 बजे तक सिविल में बिजली गुल रही

पैसे की कमी के चलते नहीं जोड़ रहे हॉटलाइन से, दो जेनरेटर भी हैं पर समय पर नहीं चलते

हरबंस सिंह को मकसूदां से फ्रेक्चर होने के बाद अस्पताल लाए थे, एमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर अपने मोबाइल की टार्च की रोशनी से मरीजों को देख रहे थे। - भास्कर

सिविल अस्पताल में रोजाना रात में ही होते हैं चार-पांच सिजेरियन आप्रेशन

अमूमन ज्यादातर आप्रेशन दिन में होते हैं और पहले से तय रहते हैं। रात को इमरजेंसी मरीज खासकर गायनी विभाग में गर्भवती महिलाओं का सिजेरियन भी करना पड़ जाता है। सिविल में रोजाना लगभग 4-5 सिजेरियन रात में ही होते हैं। पिछले दो सालों से निक्कू वार्ड में मशीनों में पड़े प्रिमेच्योर बच्चों के माता पिता की हमेशा शिकायत रही है कि जब लाइट चली जाती है तो बच्चे विचलित हो जाते हैं। जनरेटर चलने में बहुत समय लग जाता है। रामपुर निवासी 19 वर्षीय संदीप को पेट में तेज दर्द के चलते सिविल अस्पताल लाया गया था। हरबंस सिंह को मकसूदां से फ्रेक्चर होने के बाद अस्पताल लाए थे। मौके पर मौजूद एमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुरिंदर पाल अपने मोबाइल की टार्च की रोशनी से मरीजों को देख रहे थे।

सिविल जालंधर का जिला अस्पताल भी है। इसे हर हाल में बिजली की हॉटलाइन से जुड़े रहना होता है। जानकारों के मुताबिक सेहत विभाग ने बिजली विभाग को हॉटलाइन के पैसे नहीं भरे हैं जिस कारण दो साल से हॉट लाइन कट चुकी है। हॉटलाइन अहम संस्थानों में 24 घंटे बिना किसी रुकावट के बिजली की सप्लाई करती है। इसके तहत चाहे पूरे शहर में बिजली की सप्लाई ठप पड़ जाए लेकिन बिजली विभाग की कोशिश रहती है कि हॉटलाइन से जुड़े संस्थानों की बिजली बंद न हो। सिविल के पास दो जनरेटर भी हैं लेकिन समय पर चलाए नहीं जाते।

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