लड़कियां स्पोर्ट्स में आगे आएं, पेरेंट्स स्कूल से कराएं गेम शुरू : सुधीर कुमार
स्पोर्ट्स रिपोर्टर | जालंधर
लड़कों के मुकाबले लड़कियों को भी ज्यादा से ज्यादा स्पोर्ट्स में दिलचस्पी दिखानी चाहिए। इसके लिए पेरेंट्स को भी जागरूक होने की जरूरत है। आज स्पोर्ट्स में में कई ऐसे उदाहरण मौजूद हैं जहां लड़कियों ने लड़कों से कई गुणा बेहतर प्रदर्शन किया है और अपने राज्य और देश का नाम रोशन किया है। यह कहना है नेहरू गार्डन स्कूल में फिजिकल एजुकेशन के लेक्चरर सुधीर कुमार का। उन्होंने बताया कि अभी हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में हुई कॉमनवेल्थ गेम्स में भी लड़कियों ने हर गेम में मेडल हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। आज देश स्पोर्ट्स में आगे तो बढ़ रहा है और लड़कियां हर सेक्टर में आगे आ रही हैं, लेकिन फिर भी कई अभिभावक कहीं न कहीं लड़कियों को स्पोर्ट्स में मोटिवेट नहीं कर पाते और उन्हें गेम्स के लिए नहीं भेज रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में लड़कियां स्पोर्ट्स के दम पर नाम रोशन कर रही है। हाल ही में श्री देवी तालाब मंदिर में प्राचीन ब्रह्म अखाड़ा में शनिवार को 10 साल की सोनल ने दंगल में महज 20 सेकेंड में एक लड़के को चित कर दिया है, जिसे जालंधर की गीता फोगाट भी कहा जा रहा है। सोनल के पिता दीपक यादव और माता नीलम दोनों ने अपनी बेटी को इस गेम के लिए प्रेरित, जिस कारण सोनल इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर पाई। यह एक उदाहरण है उनके लिए जो स्पोर्ट्स में लड़कियों को भेजने से कतराते हैं।
सुधीर कुमार
कहने से कुछ नहीं होगा करके दिखाना होगा
लेक्चरर सुधीर कुमार ने कहा कि सिर्फ कहने से नहीं बल्कि करके दिखाना होगा। लड़कियों को स्कूलिंग के दौरान ही किसी न किसी गेम के लिए प्रेरित करें ताकि वो भी सोनल की तरह अपने माता-पिता के साथ-साथ देश का नाम रोशन कर सकें। इसके लिए पेरेंट्स को भी जागरूक होने की जरूरत है।
स्पोर्ट्स रिपोर्टर | जालंधर
लड़कों के मुकाबले लड़कियों को भी ज्यादा से ज्यादा स्पोर्ट्स में दिलचस्पी दिखानी चाहिए। इसके लिए पेरेंट्स को भी जागरूक होने की जरूरत है। आज स्पोर्ट्स में में कई ऐसे उदाहरण मौजूद हैं जहां लड़कियों ने लड़कों से कई गुणा बेहतर प्रदर्शन किया है और अपने राज्य और देश का नाम रोशन किया है। यह कहना है नेहरू गार्डन स्कूल में फिजिकल एजुकेशन के लेक्चरर सुधीर कुमार का। उन्होंने बताया कि अभी हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में हुई कॉमनवेल्थ गेम्स में भी लड़कियों ने हर गेम में मेडल हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। आज देश स्पोर्ट्स में आगे तो बढ़ रहा है और लड़कियां हर सेक्टर में आगे आ रही हैं, लेकिन फिर भी कई अभिभावक कहीं न कहीं लड़कियों को स्पोर्ट्स में मोटिवेट नहीं कर पाते और उन्हें गेम्स के लिए नहीं भेज रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में लड़कियां स्पोर्ट्स के दम पर नाम रोशन कर रही है। हाल ही में श्री देवी तालाब मंदिर में प्राचीन ब्रह्म अखाड़ा में शनिवार को 10 साल की सोनल ने दंगल में महज 20 सेकेंड में एक लड़के को चित कर दिया है, जिसे जालंधर की गीता फोगाट भी कहा जा रहा है। सोनल के पिता दीपक यादव और माता नीलम दोनों ने अपनी बेटी को इस गेम के लिए प्रेरित, जिस कारण सोनल इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर पाई। यह एक उदाहरण है उनके लिए जो स्पोर्ट्स में लड़कियों को भेजने से कतराते हैं।