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शहर की सफाई में नहीं सुधरे हालात, इस बार और गिर सकती है रैंकिंग

3 वर्ष पहले
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केंद्र सरकार के स्वच्छता सर्वे 2018 में इंदौर, भोपाल और सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ को पहला, दूसरा और तीसरा स्थान मिला है। लोगों को जालंधर की रैंकिंग का इंतजार है। पूरी सर्वे रिपोर्ट आने पर ही रैंकिंग तय होगी। जालंधर की रैंकिंग 2017 के सर्वे में 434 शहरों में 233 नंबर पर थी। इस बार शहरों की गिनती 4203 है। जालंधर की रैंकिंग इस बार और गिरने की आशंका है।

निगम ने सर्वे के लिए घोषित गाइडलाइंस पर काम नहीं किया हैै। पब्लिक फीडबैक भी ठीक नहीं गया है। खुले में शौच से शहर को मुक्त नहीं कर पाए। सेग्रिगेशन, आेपन डंप, वेस्ट मैनेजमेंट में कार्पोरेशन खाली हाथ है। सफाई से लोग खुश नहीं है। पार्कों मे खाद बनाने, आॅनलाइन सैलरी सिस्टम न होने समेत कई ऐसे कारण है जिन्होंने सर्वे में शहर को रैंकिंग में आगे बढ़ने से रोका होगा। शहर से रोज 500 टन कूड़ा वरियाणा डंप पर इकट्ठा हो रहा है।

2018 के लिए घोषित सरकार की गाइडलाइंस पर नगर निगम ने नहीं किया काम, पिछले साल 434 शहरों में 233 पर थे, इस बार मुकाबला 4203 शहरों के बीच

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सेग्रिगेशन

जालंधर : गीले और सूखे कूड़े को अलग-अलग नहीं रखा ।

इंदौर : हर घर में दो डस्टबिन, 100 प्रतिशत सेग्रिगेशन, लोग कारों में भी डस्टबिन रखते हैं।

भोपाल : लोगों को जागरूक किया। जगह-जगह नीले और हरे डस्टबिन रखवाए गए।

चंडीगढ़ : लोग कूडा छांट कर देते हैं। कूड़ा कम निकलता है।

टॉपर्स की खूबियां

खुले में शौच मुक्त

जालंधर : सर्वे से पहले पब्लिक टाॅयलेट्स नहीं बनवाए।

इंदौर : अच्छे पब्लिक टाॅयलेट्स। लोग अवेयर।

भोपाल : रोको-टोको अभियान चलाया। मॉड्यूलर टॉयलेट लगे।

चंडीगढ़ : प्लांड सिटी में पब्लिक टायलेट्स की गिनती काफी है। सफाई का पूरा इंतजाम। कम्युनिटी टायलेट्स भी हैं।

फोटो अपलोड होते ही सफाई : एप की मदद से सफाई। गंदगी की फोटो अपलोड होते ही टीम निकल जाती है।

सफाई इतनी की पाल्यूशन घट गया : सफाई से पॉल्यूशन 14 प्रतिशत कम हुआ। बीमारियां फैलने के केस कम आए।

प्लानिंग की बदौलत सिटी ब्यूटीफुल : सिटी प्लानिंग से बसी है इसलिए सफाई की भी प्लानिंग है। फंडस की भी कमी नहीं है।

वेस्ट मैनजेमेंट

जालंधर : जमशेर प्लांट रद्द। वरियाणा साइट पर विवाद, रोजाना 500 टन कूड़ा जमा ।

इंदौर : कचरे से खाद बनाने के कम्पोस्ट और वेस्ट सेनेटरी पैड प्लांट लगाया।

भोपाल : प्लांट है और कूड़ा साइट तक ले जाने के लिए 250 गाड़ियों का इंतजाम किया गया।

चंडीगढ़ : प्लांट लग चुका है। वेस्ट सीधा प्लांट में पहुंचता है।

साफ-सफाई

जालंधर : 3000 किलोमीटर सड़कें, इंतजाम सिर्फ 1800 किलोमीटर सफाई का।

इंदौर : प्राइवेट कंपनी व काम न करने वाले 1500 मुलाजिमों को हटा नई भर्ती की।

भोपाल : 200 मुलाजिमों की नई टीम उतारी, गंदगी फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई

चंडीगढ़ : बाजारों में रात को सफाई से फायदा।

अोपन डंप

जालंधर : 150 डंप खतम करने की योजना लटकी।

इंदौर : कचरे की ज्यादातर पेटियां हटा ली गई है। डंप साइट के पास की खाद के प्लांट से कूड़ा इस्तेमाल हो जाता है।

भोपाल : ओपन डंप कम किए। मेन रोड डंप कवर किए।

चंडीगढ़ : ओपन डंप नहीं। कलेक्शन का अच्छा इंतजाम।

अवेयरनेस

जालंधर : लोग जिम्मेदारी नहीं समझ रहे। पब्लिक फीडबैक में नुकसान का खतरा रहेगा।

इंदौर : दो साल तक घर-घर जाकर जागृति अभियान चलाया।

भोपाल : नोडल अफसर लगाए। स्कूल कालेजों में अभियान चलाया।

चंडीगढ़ : एप का यूज बढ़ाया। लोग जागृत है और पहले से ही सफाई का ख्याल रखते हैं।

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