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5 अफसरों पर 10 हजार फैक्ट्रियों, 350 अस्पतालों, निगम और 2.90 लाख हेक्टेयर लैंड का पॉल्यूशन रोकने की जिम्मेदारी

3 वर्ष पहले
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गेहूं की नाड़ जलने के मामले आने शुरू हो गए हैं लेकिन अभी तक पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और जिला प्रशासन ने आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए टीमों का गठन भी नहीं किया है। बोर्ड के पास पर्याप्त कर्मचारी भी नहीं हैं। जालंधर रीजनल ऑफिस में बोर्ड की टीम में मात्र एक एक्सईएन, 4 एसडीओ और 1 जेई हैं। न कोई इंस्पेक्टर और न ही कोई सुपरवाइजर। यह टीम जालंधर के अलावा कपूरथला की निगरानी भी करती है।

जिले के मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. बलविंदर सिंह छीना के मुताबिक अकेले जालंधर जिले में ही 1.79 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की खेती होती है। जबकि कपूरथला में यह क्षेत्र लगभग 1.11 लाख हेक्टेयर है। कुल 2.90 लाख हैक्टेयर एरिया जालंधर रीजनल आॅफिस की सीमा में आता है। जिले में लगभग 10 हजार औद्योगिक इकाइयां, 350 अस्पताल, एक नगर निगम और एक नगर पालिका से निकलने वाले प्रदूषण को रोकने की भी जिम्मेदारी है।

भास्कर एक्सक्लूसिव

प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के दफ्तर के स्टोर में पड़ी शराब और बियर की खाली बोतलें। इस स्टोर का इस्तेमाल बोर्ड सैंपल रखने के लिए करता है।

43 साल से वाटर एक्ट लागू नहीं कर पाया बोर्ड

प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के बारे में सबसे हैरानी की बात यह है कि 43 साल पहले जिस काम के लिए इसका गठन हुआ था उस पहले काम को यह पूरा नहीं कर पाया है। 1974 में वाटर एक्ट बना था। इसे लागू करने के लिए सरकार ने एक साल बाद 1975 में पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड का गठन किया। इसका प्रमुख काम पंजाब की इंडस्ट्री द्वारा नदियों में बहाए जाने वाले जहरीले पानी को रोकना था। यह आज तक रुक नहीं पाया है।

जालंधर के अलावा कपूरथला की निगरानी भी करती है प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की टीम

कपूरथला की टीमें तैयार हो रही हैं : एक्सईएन कक्कड़

बोर्ड के रीजनल दफ्तर के एक्सईएन अरुण कक्कड़ ने बताया कि कपूरथला जिले में गेहूं के नाड़ जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी के लिए टीमों का गठन किया जा रहा है। इसके तहत प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, रेवेन्यू, पुलिस और कृषि विभाग के अधिकारी मिलकर टीम बनाएंगे। ये टीमें बोर्ड के अधिकारी को आरोपी किसान के ब्यौरे देंगी और बोर्ड उनके चालान काटेगा। इस सीजन किसी का चालान नहीं काटा गया है।

लेदर इंडस्ट्री और इंडस्ट्रियल एरिया का सारा वेस्ट ड्रेन में जाता है...काला संघिया ड्रेन में फोकल प्वाइंट, इंडस्ट्रियल एरिया और लेदर कांप्लेक्स की इंडस्ट्री का जहरीला पानी सीधे या चोरी छिपे छोड़ा जाता है।

क्या कहते हैं अधिकारी

हम सरकार को बार-बार लिख रहे हैं, हमें अधिकारी दिए जाएं : पन्नू

प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन काहन सिंह पन्नू ने बताया कि अधिकारी कम हैं इसकी जानकारी सरकार को दी जा चुकी है। उनकी नियुक्ति के लिए हम बार बार चिट्ठी लिख चुके हैं। गेहूं के नाड़ जलाने वाले किसान कम हैं। क्योंकि गेहूं से भूसा निकलता है और उसका इस्तेमाल किसान पशुपालन में करते ही आए हैं इसलिए हमें नाड़ से ज्यादा चुनौती पराली के जलने पर मिलती है। किसानों को जागरूक किया जा रहा है और वाटर एक्ट के पालन को सुनिश्चित किया जा रहा है।

छह महीने में सिर्फ 16 बुलेट सवारों को नोटिस भेजे...नॉयस पॉल्यूशन रोकने के लिए बोर्ड ने अक्टूबर 2017 में बुलेट के पटाखों और प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल करने वाले मात्र 16 लोगों को ही नोटिस जारी किए हैं।

बोर्ड किन-किन नियमों की पालना सुनिश्चित कराने के लिए बना है

वाटर एक्ट 1974

वाटर सैस एक्ट 1977

एयर एक्ट 1981

एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986

हेजार्डस वेस्ट नियम 1989

पब्लिक लायबिलिटी इंश्योरेंस एक्ट 1991

एनवायर्नमेंट इंपेक्ट असेसमेंट सर्टिफिकेट जारी करना 1994

कैमिकल एक्सिडेंट रुल्स 1996

बायोमेडिकल वेस्ट नियम 1998

रिसाइकल्ड प्लास्टिक रुल्स 1999

निगम सॉलिड वेस्ट रुल्स 2000

नॉयस पॉल्यूशन 2000

बैटरी रुल्स 2001

एक्ट और नियमों को मिलाकर...कुल 19 लक्ष्य हैं जिन पर बोर्ड काम करता है। बोर्ड पंजाब में फैक्ट्रियों को एनओसी भी जारी करता है। उन्हें तभी एनओसी दी जाती अगर इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाला पानी ट्रीट कर नदी में छोड़ा जा रहा होता है।

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