पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Punjab
  • Jalandhar
  • नए साल में रेगुलेटरी कमीशन ने टैरिफ रोका, पिछले साल के Rs.75 करोड़ बकाया

नए साल में रेगुलेटरी कमीशन ने टैरिफ रोका, पिछले साल के Rs.75 करोड़ बकाया

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
इंडस्ट्री के लिए नई मुसीबत स्टार्ट हो गई है। रेगुलेटरी कमीशन के ताजा फैसले से नए साल का बिजली टैरिफ टाल दिया गया है। अब ये जब लागू होगा तो 1 अप्रैल बैकडेट से बिल देना पड़ेगा। पिछले साल 8 महीने बैकडेट से बिल लिए गए थे।

इसके करीब 75 करोड़ रुपये चुकने बाकी हैं, जबकि करीब 100 करोड़ नए साल के भी बन जाएंगे। जब कोई प्रोडक्ट फैक्ट्रियां तैयार करती हैं तो इसकी लागत में बिजली का खर्च भी जुड़ा होता है। कारोबारी कह रहे हैं कि बाजार में कंपीटिशन के चलते उनके प्रोडक्ट तो मौजूदा बिजली रेट के हिसाब से ही बिक रहे हैं, जब पावरकॉम बैकडेट से पैसा मांगता है तो वह मुनाफे में से भरा जाता है।

पॉवरकॉम को 60% रेवेन्यू फैक्ट्रियों, व्यापारिक कनेक्शन से है
स्टेट पावर रेगुलेटरी कमिशन ने लेटर जारी करके कहा है कि अभी पंजाब का बिजली टैरिफ तय नहीं हुआ है। इसमें अभी समय लगेगा। इसलिए जो पिछले साल का टैरिफ लागू है, इसी के अनुसार फिलहाल उपभोक्ताओं को बिल भेजे जाएंगे। जालंधर में 3 लाख से अधिक बिजली कनेक्शन हैं। सिटी में करीब 15 हजार फैक्ट्रियों के कनेक्शन हैं। पावरकॉम के 1200 करोड़ के रेवेन्यू का करीब 60% ये फैक्ट्रियां व व्यापारिक कनेक्शन देते हैं, जब बैकडेट से बिजली बिल मांगे जाते हैं। जालंधर रबड़ फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट नीरज अरोड़ा का कहना है कि जब नए साल में टैरिफ बढ़ेगा तो अतिरिक्त बनती रकम हमसे सरकार बैकडेट से लेगी। हमने सारा सामान तो मौजूदा लागत के हिसाब से सेल कर दिया। जो अतिरिक्त रकम बनेगी, वो सारी हमारी जेब से जाएगी।

फिक्स चार्जेज खत्म करने की मांग
रबड़ गुड्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी राकेश बहल ने कहा कि छोटी इंडस्ट्री पर फिक्स चार्जेज नहीं लगने चाहिए। सरकार ने जब 5 रुपये यूनिट देनी शुरू की तो फिक्स चार्जेज लगाकर छोटी इंडस्ट्री से प्रति यूनिट करीब 1 रुपये की औसत से नया शुल्क भी लेना स्टार्ट किया, बड़ी इंडस्ट्री के लिए फिक्स चार्जेज सिस्टम संकट पैदा नहीं करता, हम लोग परेशान हैं।

सरकार हर साल 1 अप्रैल से ही लागू करे टैरिफ: बलराम
जेएमपी इंडस्ट्री के बलराम कपूर कहते हैं - लोहा पिघलाने वाली इंडस्ट्री में सबसे बड़ा खर्च बिजली का है। जिसका जितना हैवी पावर लोड है, वो उतना ही बड़ी रकम बैकडेट में देगा। ये तरीके गलत है। सरकार को हर साल 1 अप्रैल से ही नया टैरिफ लागू

करना चाहिए।

10,000 से अधिक कारखाने प्रभावित

जालंधर सिटी में 10 हजार से अधिक कारखानों के कनेक्शन प्रभावित हैं। अगर व्यापारिक कनेक्शन की बात करें तो करीब 70 हजार कनेक्शन बनेंगे, इतने ही जीएसटी डीलर हैं।

चुनाव के बाद रेट बढ़ा देती है सरकार: हरीष गुप्ता
लघु उद्योग भारती के जालंधर के प्रेसिडेंट हरीष गुप्ता कहते हैं - पिछले साल 8 महीने बैकडेट से बिल मांगा गया। जब चुनाव का सीजन हो तो सरकार रेट बढ़ाने का फैसला रोक लेती है, जैसे ही चुनावी नतीजे आ जाते हैं, रेट बढ़ जाते हैं। आटो पार्ट्स इंडस्ट्री ने तो टैरिफ की देरी रोकने के लिए सरकार को लैटर भी भेजी है।

खबरें और भी हैं...