60000 एलईडी लाइट्स पेंडिंग, कंपनी बोली- हाउस की गारंटी मिली तो ही शुरू करेंगे काम
सिटी की 65 हजार स्ट्रीट लाइट्स को बदलने का काम निगम हाउस की मीटिंग में गारंटी पास होने पर वार्डों में शुरू होगा। कांट्रेक्ट कंपनी पीएचपी इंटरनेशनल को निगम ने करीब 5 करोड़ रुपये की गारंटी देनी थी। निगम का अकाउंट पंजाब नेशनल बैंक में है।
नीरव मोदी के फ्राड के बाद बैंक ने गारंटी की प्रक्रिया कठिन कर दी है, जिससे गारंटी नहीं मिल पाई। कंपनी ने निगम प्रशासन से कहा है कि अगर उन्हें हाउस में गारंटी का प्रस्ताव पास करके दे दिया जाएगा तो वे काम शुरू कर देंगे। अभी तक सिर्फ 5 हजार लाइट्स ही बदली जा सकी हैं और ये सभी मेन रोड्स की हैं। काउंसलरों का दबाव है कि वार्डों में लाइटें बदलने का काम जल्द शुरू किया जाए। उन्हें सबसे ज्यादा शिकायतें स्ट्रीट लाइटों की ही मिलती हैं।
बचेगी बिजली
कितने वाट में होगी रिप्लेसमेंट गिनती
40 से 18 में 10155
70 से 30 में 17113
150 से 60 में 34905
250 से 100 में 2287
400 से 135 में 587
2018-19 के बजट में भी 3 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान है। अगर लाइटें लग जाती हैं तो निगम की 10 फीसदी बिजली बजत से भी 2 करोड़ रुपए का फायदा हो जाएगा।
सिटी की 65 हजार स्ट्रीट लाइट्स को बदलने का प्रोजेक्ट
नगर निगम के विवादित प्रोजेक्ट-2
30 करोड़ रुपए की बिजली ज्यादा फूंकी
एलईडी स्ट्रीट लाइट्स लगने से 65 प्रतिशत तक बिजली बचेगी। इस समय करीब 19 लाख रुपए बिल आ रहा है। एलईडी लाइट्स लगाने के बाद बिजली की खपत कम होगी। सरकार ऐसे प्रोजेक्ट इसी लिए ला रही है ताकि एनर्जी सेविंग बढ़े। लाइट्स पहले ही बदल दी जाती तो अब तब करीब 30 करोड़ रुपये की बिजली बच सकती थी। एलईडी लाइटों की खपत कम होती है। जो लाइट्स लगेंगी, उनमें टेक्नोलॉजी भी माडर्न होगी। जब सड़क पर ट्रैफिक कम होगा तो लाइटें डिम हो जाएंगी।
सोडियम लाइट्स की मेनटेनेंस भी प्रभावित
जब से एलईडी प्रोजेक्ट फाइनल हुआ है, तब से सोडियम लाइट्स की मेनटेनेंस भी प्रभावित है। जो सोडियम लाइट्स खराब हो जाती हैं, वे बदली नहीं जा रहीं। निगम नई खरीद भी नहीं कर रहा। निगम हाउस में प्रस्ताव पास हाेने पर लाइटें बदलने के काम में तेजी आएगी। 6 दिसंबर 2016 को टेंडर जारी हुआ था और निगम ने विधानसभा चुनाव के लिए कोड ऑफ कंडक्ट लगने के कारण वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया। प्रदेश में सरकार बदल गई और प्रोजेक्ट की मंजूरी में समय लग गया। अगस्त 2017 में वर्क आर्डर जारी होने के बाद काम शुरू हुआ। सिर्फ मेन रोड्स पर ही काम हो सका, वह भी राजनीतिक दबाव में। वार्डों मे काम किस तरह होगा, इसकी प्लानिंग भी नहीं हो पाई। कंपनी बिना गारंटी रिस्क नहीं लेना चाहती।
नीरव मोदी के फ्राड के बाद ने बैंक गारंटी की प्रक्रिया कर दी है कठिन
ऐेसे समझिए...
देरी से 8 करोड़ रुपए का नुकसान
एलईडी लाइट्स प्रोजेक्ट मे देरी से निगम को दो साल में करीब 8 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अगर लाइटें समय पर बदल जातीं तो मेनटनेंस के लिए कांट्रेक्ट न करना पड़ता। पिछले साल निगम ने पौने 3 करोड़ रुपए खर्च किए। साल 2018-19 के बजट में भी 3 करोड़ रुपये खर्च का प्रावधान है। निगम जोन के हिसाब से टेंडर जारी करता है। अगर लाइटें लग जातीं तो बिजली का बिल भुगतान में निगम को 10 प्रतिशत की बचत के हिसाब से 2 करोड़ का फायदा हो सकता था।
रोजाना 100 से ज्यादा आ रहीं कंप्लेंट्स
सबसे ज्यादा कंप्लेंट्स स्ट्रीट लाइट्स की हाेती हैं। सिटी को निगम ने 7 जोन में बांटा है। 5 जाेन का ठेका दिया हुआ है और 2 जोन में निगम खुद मेनटनेंस कर रहा है। रोजाना करीब 100 शिकायतें मिल रही हैं। एलईडी लाइट्स का प्रोजेक्ट आने के बाद मेनटनेंस में भी कमी आई है। खराब लाइटें बदली नहीं जा रहीं। जो लाइटें बदली गई हैं, वहां पुरानी सोडियम लाइट्स को कांट्रेक्टर ने ही खरीद लिया है। मेनटनेंस में कमी से लोगों में पैदा हो रही नाराजगी काउंसलरों को झेलनी पड़ रही है।
हाउस में गारंटी का प्रस्ताव पास करना होगा
कांट्रेक्ट कंपनी पीएचपी इंटरनेशनल को करीब 5 करोड़ रुपये की बैंक गांरटी देनी है। पंजाब नेशलन बैंक ने फिलहाल बैंक गारंटी देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में कांट्रेक्टर चाहता है कि गारंटी के रूप में हाउस में प्रस्ताव पास किया जाए।
-लखविंदर सिंह, एसई नगर निगम